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सुरक्षित समुद्र, मजबूत व्यापार… भारत-सिंगापुर की साझेदारी से जानें कितना सुरक्षित होगा भविष्य

एशिया में समुद्री जहाजों में डकैती और हथियारबंद लूटपाट से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग (आरईसीएएपी) के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत समूह के सिंगापुर स्थित सूचना साझाकरण केंद्र (आईएससी) के साथ अपने जुड़ाव को और गहरा करेगा। समूह के कार्यकारी निदेशक विजय डी चाफेकर ने यह जानकारी दी। चाफेकर ने शनिवार को बताया, ‘‘हम एशिया में सुरक्षित समुद्रों (नौवहन) को बढ़ावा देने के लिए आरईसीएएपी के भारतीय केंद्र बिंदु, समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) के साथ घनिष्ठ सहयोग की उम्मीद करते हैं।’’ भारत 21 देशों के आरईसीएएपी के संस्थापक सदस्यों में से एक है, जिसे समुद्री सुरक्षा और जहाज सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक क्षेत्रीय, सरकार-से-सरकार संस्था के रूप में स्थापित किया गया था। चाफेकर ने कहा कि इस समूह में एशिया के बाहर के देश भी रुचि दिखा रहे हैं। भारतीय तटरक्षक बल के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक ने कहा, “जहाजों पर होने वाले अधिकतर हमले अब इंजन और मशीनरी के पुर्जों की चोरी के लिए होते हैं, जिनकी समानांतर बाजारों में मांग है। हाल के वर्षों में चालक दल के अपहरण या जहाजों के अपहरण की कोई घटना नहीं हुई है।” वह तीन साल से आरईसीएएपी की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरईसीएएपी अब अपनी स्थापना के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में समारोह मनाने की तैयारी कर रहा है जो मार्च में सिंगापुर में आयोजित होगी। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि एजेंसी की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि सिंगापुर फोरम में उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की उम्मीद है। चाफेकर ने कहा, ‘‘हालांकि सबसे कमजोर कड़ी अब भी मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य (एसओएमएस) है, जहां 2025 में समुद्री डकैती की घटनाएं बढ़ी हैं, हालांकि ये ज्यादातर छोटी-मोटी चोरी के मामले थे।’’ उन्होंने बताया कि भारतीय बंदरगाहों के आसपास घटनाओं में हल्की बढ़ोतरी हुई है। काकीनाडा में दो और कांडला में एक मामला दर्ज हुआ। आरईसीएएपी आईएससी के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भी भारतीय बंदरगाहों पर ऐसी दो घटनाएं हुई थीं। चाफेकर ने कहा कि काकीनाडा में हुए हमलों में से एक के अपराधियों की गिरफ्तारी से भारतीय जलक्षेत्र में इस तरह की घटनाओं में कमी आई है।

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