अमेरिका ने हाल फिलहाल में जिस कीमती चीज के लिए वेनेजुएला और ईरान पर हमला किया वो चीज अगर बलूचिस्तान बड़े ही आराम से भारत को दे दे तो सोचिए क्या होगा। यह कीमती चीज तेल है। तेल के लिए चल रही जंग के बीच बलूचों का वो ऐलान आज फिर चर्चा में है जिसमें बलूचों ने कहा था कि अगर हम पाकिस्तान से आजाद हो गए तो हम भारत को तीन बड़ी चीजें दे सकते हैं। बलूचों ने अपनी आजादी में भारत की मदद के बदले भारत को ही एक बहुत शानदार ऑफर दिया था। हैरानी की बात देखिए कि बलूच भारत को जो चीज देना चाहते हैं वही चीज अमेरिका पाकिस्तान की मदद से बलूचिस्तान से छीनना चाहता है। बलूचिस्तान के मशहूर एक्टिविस्ट मीरया बलोच ने कुछ समय पहले बलूचिस्तान और दुनिया के अलग-अलग कोने में रहने वाले 6 करोड़ बलूचों की तरफ से भारत को एक बड़ा ऑफर दिया था। मीरियार बलोच ने बताया था कि अगर हम पाकिस्तान से आजाद हो गए तो भारत को यह तीन चीजें देंगे। सबसे पहले मीरियार बलोच ने बताया कि आजाद बलूचिस्तान में भारत को सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मिलेगा। बलूचिस्तान में नेचुरल रिसोर्सेज के भंडार है। बलूचिस्तान में तेल भी है और गैस भी। बलूचिस्तान क्रिटिकल मिनरल्स से भी भरा हुआ है। बलूचिस्तान की जमीन के नीचे अरबों डॉलर का खजाना छुपा है। सोचिए अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से आजाद हो गया और भारत को किया गया पहला वादा पूरा कर दिया तो भारत को कितना बड़ा फायदा मिलेगा। मीरयार बलोच ने यह भी बताया कि बलूचिस्तान भारत को एक बड़ा कॉरिडोर भी दे सकता है। यह कॉरिडोर भारत को सेंट्रल एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप तक सीधे जोड़ देगा। चलिए, यह तो बात हुई ऊर्जा और कनेक्टिविटी की। मीरियार बलोच ने बताया था कि अगर हम पाकिस्तान से आजाद हो गए तो भारत को यह तीन चीजें देंगे। सबसे पहले मीरियार बलोच ने बताया कि आजाद बलूचिस्तान में भारत को सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मिलेगा। बलूचिस्तान में नेचुरल रिसोर्सेज के भंडार है। बलूचिस्तान में तेल भी है और गैस भी। बलूचिस्तान क्रिटिकल मिनरल्स से भी भरा हुआ है। बलूचिस्तान की जमीन के नीचे अरबों डॉलर का खजाना छुपा है। सोचिए अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से आजाद हो गया और भारत को किया गया पहला वादा पूरा कर दिया तो भारत को कितना बड़ा फायदा मिलेगा। मीरयार बलोच ने यह भी बताया कि बलूचिस्तान भारत को एक बड़ा कॉरिडोर भी दे सकता है। यह कॉरिडोर भारत को सेंट्रल एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप तक सीधे जोड़ देगा। चलिए, यह तो बात हुई ऊर्जा और कनेक्टिविटी की।
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