प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के अभियान में ‘जल सारथी’ मोबाइल ऐप ग्रामीणों को योजनाओं की लाइव जानकारी और शिकायत समाधान की सुविधा मिल रही है। पाइल बिझाने से लेकर टोटी और टंकियों के कार्य में होने वाली अनियमितता की पूरी सूचना दी जा सकती है, जिसपर विभाग से लेकर शासन तक समाधान और कार्रवाई तय करता है। नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार के अनुसार ‘जल सारथी’ ऐप के जरिए राज्य से लेकर गांव स्तर तक चल रही परियोजनाओं की लाइव मॉनिटरिंग संभव हो गई है। मल्टी लेवल डैशबोर्ड के माध्यम से किसी भी गांव में पानी की टंकी, पाइपलाइन या घरेलू नल कनेक्शन की स्थिति एक क्लिक पर देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 75 जिलों की लगभग 58 हजार ग्राम पंचायतों में करीब 40 हजार परियोजनाओं के जरिए हर घर तक जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इन सभी परियोजनाओं को ऐप से ऑनलाइन जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति की निगरानी की जा सके।
पानी के स्रोत से घर की टोटी तक निगरानी
‘जल सारथी’ ऐप में जियो टैगिंग आधारित व्यवस्था लागू की गई है। जैसे ही किसी गांव में पाइपलाइन, टंकी या नल कनेक्शन का कार्य पूरा होता है, उसकी जानकारी ऐप पर अपडेट हो जाती है। इससे विभाग पानी के स्रोत से लेकर घरों में लगी टोटी तक पूरी प्रणाली की निगरानी कर पा रहा है। पाइपलाइन, मोटर और टंकी जैसी परिसंपत्तियों का संचालन भी इसी माध्यम से ट्रैक किया जा रहा है।
शिकायत के लिए नहीं लगाने पड़ते चक्कर
ग्रामीण अब ऐप के जरिए नए नल कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं और जलापूर्ति में समस्या होने पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। ऐप पर प्लंबर, ग्राम प्रधान और जल निगम अधिकारियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। ऐप के जरिए पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत की स्थिति भी देखी जा सकती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए लगभग दो लाख किलोमीटर सड़कें खोदी गई थीं, जिनमें से 1.94 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का पुनर्निर्माण पूरा किया जा चुका है।
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