प्रदेश में गोबरधन योजना के जरिए गांवों में स्वच्छता के साथ आर्थिक सशक्तिकरण का नया मॉडल विकसित हो रहा है। गोबर और जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से जहां स्वच्छ वातावरण बन रहा है, वहीं ऊर्जा और जैविक खाद उत्पादन के माध्यम से ग्राम पंचायतों की आय भी बढ़ रही है। फरवरी 2026 तक पंचायतों ने जैविक खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री से 28 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है। आय के मामले में ललितपुर जिला सबसे आगे है, जहां 3.37 लाख रुपये से अधिक की कमाई हुई है। इसके बाद श्रावस्ती और रामपुर का स्थान है। प्रदेश के 74 जिलों में 116 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें गोबर, रसोई कचरा और कृषि अवशेषों से स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद तैयार की जा रही है। कई संयंत्र गौशालाओं में भी लगाए गए हैं। बायोगैस ऊर्जा का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सुविधाओं के लिए किया जा रहा है। रामपुर में तेल पिराई मशीनें, जबकि आगरा, ललितपुर, श्रावस्ती, बुलंदशहर, बांदा, सोनभद्र और हरदोई में आटा चक्कियां संचालित हो रही हैं। इससे ग्रामीणों को सुविधाएं मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। निदेशक अमित कुमार सिंह ने गोबरधन योजना को ग्रामीण विकास का प्रभावी मॉडल बताया। गोबरधन योजना स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और पंचायतों की आय-तीनों को मजबूती दे रही है। गोबरधन योजना से गांवों में स्वच्छता के साथ समृद्धि की दिशा में तेजी से बदलाव आ रहा है।
GDS Times | Hindi News Latest News & information Portal