योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में मंत्री राकेश सचान ने रेशम विभाग द्वारा आयोजित सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ किया और बताया कि शुद्ध सिल्क की पहचान के लिए पहली बार एक्सपो में सिल्क टेस्टिंग लैब स्थापित की गई है, जहां लोग मौके पर ही रेशम की शुद्धता की जांच करा सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को असली और मिलावट-मुक्त सिल्क खरीदने में सुविधा मिलेगी। गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बुधवार को रेशम उद्योग मंत्री ने बताया कि एक्सपो में शुद्ध रेशम की पहचान और मिलावट से बचाव पर विशेष फोकस किया गया है। साथ ही कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेशम उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां उत्पादन 27 मीट्रिक टन था, वह अब बढ़कर 450 से 500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को रेशम उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। 6 फरवरी तक चलने वाले इस सिल्क एक्सपो में उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के बुनकरों के 55 स्टाल लगाए गए हैं। यहां बनारसी, चंदेरी, कांजीवरम, मैसूर सिल्क, पैठणी और धर्मावरम साड़ियों समेत शुद्ध रेशमी उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है।इस अवसर पर पं. दीनदयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान प्रदान किया गया और रेशम मित्र-2025 पत्रिका का विमोचन भी हुआ।
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