पश्चिम एशिया में 17 दिनों से जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले 20% वैश्विक तेल की आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। ऐसे में भारत ने कूटनीति का मजबूत रास्ता अपनाते हुए भारतीय ध्वज वाले जहाजों का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि भारत ने ईरान के साथ कोई नया समझौता या लेन-देन नहीं किया है। उन्होंने कहा, “हमारी ईरान के साथ पुरानी दोस्ती और सहयोग है। इसी आधार पर भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। यह कोई सौदा या व्यापार का मामला नहीं है।” जयशंकर ने बताया कि ईरानी अधिकारियों के साथ सीधा और निर्णायक संवाद चल रहा है, जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। पिछले सप्ताह दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिली थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच टेलीफोनिक बातचीत के कुछ घंटों बाद आया था। यह वार्ता अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं का पहला संपर्क था। इसके अलावा, जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच भी लगातार चर्चा हुई। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक भारतीय जहाज को केस-बाय-केस आधार पर अनुमति दी जा रही है और अभी भी कई जहाजों को इस मार्ग से गुजरना बाकी है।
होर्मुज किसके लिए बंद?
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को मुख्य रूप से अमेरिकी, इस्राइली जहाजों और उनके सहयोगी देशों के लिए बंद रखा है। भारत ने इस संकट में सैन्य हस्तक्षेप या गठबंधन में शामिल होने के बजाय शांतिपूर्ण संवाद का रास्ता चुना है।
ट्रंप का आह्वान, लेकिन साथी तैयार नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से होर्मुज की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी, लेकिन जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत अधिकांश देशों ने इससे इनकार कर दिया। भारत ने भी युद्धपोत भेजने के बजाय कूटनीतिक चैनलों के जरिए अपने हितों की रक्षा की रणनीति अपनाई है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत अपनी इस सफल कूटनीति को यूरोपीय देशों के साथ साझा करने को तैयार है, लेकिन हर देश की ईरान के साथ स्थिति अलग-अलग है, इसलिए एक जैसा फॉर्मूला सभी पर लागू नहीं हो सकता। यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत ने संकट के बीच संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति के दम पर अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखा है, बिना किसी बड़े समझौते या सैन्य दबाव के।
GDS Times | Hindi News Latest News & information Portal