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झूठी FIR कराने वालों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्तः चलेगा मुकदमा… गवाह भी नहीं बचेंगे

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुछ लोगों द्वारा झूठी प्राथमिकी दर्ज कराए जाने को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को निर्देश दिया है कि वह इस तरह की झूठी या दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट दर्ज कराने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से मुकदमा चलाए। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसा करने में विफल रहने पर पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने अलीगढ़ के उम्मे फरवा द्वारा दायर एक याचिका को निस्तारित करते हुए कहा, ”यदि इस अदालत द्वारा दिए गए निर्देश का अक्षरशः पालन नहीं किया जाता है तो यह अदालत की अवमानना के समान होगा और पीड़ित व्यक्ति पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के ऐसे तिरस्कारपूर्ण आचरण के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए इस अदालत से संपर्क कर सकता है।” अदालत ने बुधवार को दिए अपने आदेश में निर्देश दिया कि पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देशित करेंगे कि जांच करते समय यदि अंतिम रिपोर्ट

में आरोपी को दोषमुक्त किया जाता है तो ऐसे हर मामले में, जहां झूठी, तुच्छ या भ्रामक सूचना देकर पुलिस तंत्र का दुरुपयोग किया गया है, सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ एक लिखित शिकायत अवश्य दी की जाए। पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक,

साथ ही सभी जांच अधिकारियों, थाना अधिकारियों और अन्य अधिकारियों को इस संबंध में विशिष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

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