अमेरिका और चीन के बीच की दुश्मनी वर्तमान में ‘शीत युद्ध 2.0’ (Cold War 2.0) का रूप ले चुकी है। स्थिति के अनुसार, यह विवाद अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, जासूसी और सैन्य शक्ति के वर्चस्व की जंग बन गया है।वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाते हुए संयुक्त
राज्य अमेरिका और ताइवान ने बृहस्पतिवार को एक व्यापक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “व्यापार असंतुलन दूर करने” की नीति के तहत किया गया यह समझौता एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। अमेरिका और ताइवान ने एक बड़े व्यापार समझौते पर
सहमति जताई, जिसके तहत ताइवान की वस्तुओं पर शुल्क में कटौती की जाएगी और बदले में ताइवान अमेरिका में 250 अरब अमेरिकी डॉलर के नए निवेश करेगा। यह समझौता उन हालिया व्यापार सौदों में शामिल है जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किए हैं। इससे पहले उन्होंने यूरोपीय संघ और जापान के साथ भी
ऐसे समझौते किए थे। ये सभी समझौते ट्रंप द्वारा पिछले साल अप्रैल में व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए पेश की गई व्यापक शुल्क योजना के बाद किए गए हैं। ट्रंप ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के साथ रिश्तों को स्थिर करने के उद्देश्य से एक साल के व्यापारिक संघर्ष-विराम (ट्रेड ट्रूस) पर भी सहमति
जताई। शुरुआत में ट्रंप ने ताइवान से आने वाले सामान पर 32 प्रतिशत शुल्क तय किया था, जिसे बाद में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। नए समझौते के तहत अब शुल्क दर को और कम करके 15 प्रतिशत कर दिया गया है जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के अन्य व्यापारिक साझेदारों जैसे जापान और दक्षिण कोरिया
पर लगाए गए शुल्क के बराबर है।
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