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Maa Baglamukhi Mantra: Mahabharat में विजय के लिए श्रीकृष्ण ने किया था इस Devi का पूजन

मां बगुलामुखी दस महाविद्याओं में से 8वीं महाविद्या के रूप में पूजी जाती हैं। वहीं कलियुग में भी मां बगुलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट हैं। मां बगुलामुखी को शक्ति की उग्र स्वरूपा देवी माना जाता है। मां बगुलामुखी को शत्रुओं का नाश, विजय की प्राप्ति और भय का अंत करने में सहायक मानी जाती हैं। अक्सर भक्त मां बगुलामुखी की पूजा वाक् और बुद्धि पर नियंत्रण, विपरीत परिस्थितियों से रक्षा और शत्रु बाधाओं को दूर करने के लिए करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध से ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों ने मां बगुलामुखी की साधना की थी, जिससे वह जल्दी विजय प्राप्त कर सकें और शत्रुओं का अंत हो सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मां बगुलामुखी के मंत्र जाप, विधि और लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं।

पूजा विधि

मां बगुलामुखी की पूजा में पीले रंग का अधिक महत्व होता है। ऐसे में मां बगुलामुखी की पूजा करने के दौरान जातक को स्नान-ध्यान करने के बाद पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। फिर उनकी पूजा भी पीले रंग के आसन पर बैठकर करना चाहिए। पूजा स्थान पर मां बगुलामुखी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें, फिर पीले पुष्प और पीले फल आदि अर्पित करें। मां बगुलामुखी को हल्दी का तिलक करें और संभव हो तो हल्दी की माला अर्पित करें।

वहीं मां बगुलामुखी की पूजा करने वाले जातक का आहार-विहार और व्यवहार भी सात्विक रहना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और पवित्र मन के साथ मां बगुलामुखी की पूजा करने से जातक की मनोकामना शीघ्र पूरी होती है।

मंत्र

‘ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा’। 

पूजा के लाभ

बगुलामुखी मां की पूजा करने से व्यक्ति को शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।

मां बगुलामुखी की पूजा से वाद-विवाद और न्यायिक मामलों में भी सफलता मिलती है।

साहस, आत्मबल और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है, इससे समाज में जातक का मान-सम्मान बढ़ता है।

मां बगुलामुखी की पूजा करने से आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति मिलती है।

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