शारदीय नवरात्र के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं की सुरक्षा, बालिकाओं की शिक्षा और महिला स्वावलंबन के लिए संकल्प लेने की अपील की है। ‘योगी की पाती’ में उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय धर्म और न्याय की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। मां के नौ स्वरूपों में अहंकार, दुराग्रह, आसक्ति और नकारात्मक प्रवृत्तियों पर साहस, संकल्प, शक्ति और धर्म की जीत का संदेश निहित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्र हमें सिखाता है कि सज्जनता तभी प्रभावी होती है, जब उसके साथ शक्ति और संकल्प भी हों। यही भावना मातृशक्ति को सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर बनाने का आधार है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस पर्व पर उपासना और उपवास के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी संकल्प लें।
मां दुर्गा की विजय में धर्म और न्याय का संदेश
योगी आदित्यनाथ ने मां दुर्गा के प्राकट्य और महिषासुर वध का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उसके अत्याचारों से तीनों लोकों में हाहाकार मचा, तब देवताओं की सामूहिक ऊर्जा से आदिशक्ति का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म और न्याय की पुनर्स्थापना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी विजय और शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामना और सकारात्मक संकल्प का अवसर है।
उन्होंने लंका विजय से पहले प्रभु श्रीराम की मां जगतजननी की साधना का प्रसंग भी साझा किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, 108 नीलकमलों में एक कम पड़ने पर श्रीराम ने अपना नयन अर्पित करने का निश्चय किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां प्रकट हुईं और उन्हें विजय का वरदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ममता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति मां त्रैलोक्य की रक्षा के लिए चंडी का रूप धारण करती हैं। वह मधु-कैटभ, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे दानवों का संहार करती हैं। मां के विभिन्न स्वरूपों में बुराइयों पर अच्छाई की जीत और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा मिलती है।
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