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Iran के डर से America ने UK से हटाए अपने B-1 Bombers, ‘महाशक्ति’ के पसीने छूटते देख दुनिया हैरान!

ईरान का डर अमेरिका के मन में किस कदर घर कर चुका है, इसकी तस्वीर अब पूरी दुनिया देख रही है। दुनिया भर को अपनी सैन्य ताकत का डर दिखाने वाला अमेरिका खुद अपनी सैन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा में जुट गया है। ईरान से जुड़े संभावित खतरे ने वॉशिंगटन की चिंता इतनी बढ़ा दी कि ब्रिटेन के सुरक्षित माने जाने वाले RAF Fairford सैन्य अड्डे से उसने अपने सभी B-1 बमवर्षक वापस बुला लिए। यह बदलते शक्ति-संतुलन का ऐसा संकेत है जिसमें दुनिया का सबसे ताकतवर सैन्य देश माने जाना वाला अमेरिका भी ईरान से जुड़े खतरे को लेकर अपने रणनीतिक हथियारों को सुरक्षित ठिकानों पर खिसकाने को मजबूर दिखाई दे रहा है। इस फैसले के बारे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि यह निर्णय ‘कुछ धमकियों’ के बाद लिया गया और इन धमकियों का संबंध ईरान से हो सकता है। ट्रंप ने कहा, “वे ईरान से जुड़े होंगे।” उनका तर्क था कि जब खतरा सामने हो तो बमवर्षकों को वहीं रखकर “दुश्मन को न्योता” देने का कोई मतलब नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि विमानों को हटाने में बहुत कम खर्च आता है। हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि खतरा किस तरह का था, ट्रंप ने ड्रोन हमले की रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो संबंधित लोगों को “भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि RAF Fairford कोई सामान्य सैन्य अड्डा नहीं है। लंदन से करीब 145 किलोमीटर पश्चिम स्थित यह यूरोप में अमेरिकी भारी बमवर्षकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है। हम आपको याद दिला दें कि ब्रिटेन ने मार्च में अमेरिका को Fairford का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ विशेष रूप से रक्षात्मक अभियानों के लिए करने की अनुमति दी थी। संघर्ष के दौरान यहां से अमेरिकी बमवर्षकों की आवाजाही हुई और इन विमानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों में भी किया गया। ब्रिटेन ने हालांकि अमेरिका को ब्रिटिश ठिकानों से ईरान के खिलाफ आक्रामक हमलों की अनुमति नहीं दी थी। यही मतभेद पहले से ही दोनों सहयोगियों के रिश्तों में तनाव पैदा कर रहा था। अब इस एयरबेस की सुरक्षा को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने खतरे की गंभीरता बढ़ा दी है। 27 सितंबर को एक स्थानीय किसान ने तीन वैन और नकाबपोश लोगों की संदिग्ध गतिविधि देख पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद पांच ब्रिटिश युवकों को गिरफ्तार किया गया। बाद में एक ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति को भी पकड़ा गया। वैन से विस्फोटक तो नहीं मिला, लेकिन पेट्रोल बरामद हुआ। सभी संदिग्ध फिलहाल जमानत पर रिहा हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले ही इस कथित साजिश को “बड़ा नुकसान” पहुंचाने की योजना बताया था। हैरानी की बात यह है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने एयरबेस को सुरक्षित बताया है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों को खतरे का स्तर इतना गंभीर लगा कि उन्होंने वहां मौजूद सभी B-1 विमानों को वापस अमेरिका भेज दिया। पेंटागन ने भी विमानों की वापसी की पुष्टि करते हुए कहा कि अभियानगत सुरक्षा कारणों से अमेरिकी सैन्य परिसंपत्तियों की गतिविधि वास्तविक समय में सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि अमेरिका को अपने सभी ठिकानों की सुरक्षा पर भरोसा है, लेकिन साथ ही उन्होंने माना कि अमेरिकी प्रतिष्ठानों को सैद्धांतिक रूप से किसी भी समय निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस कदम को “अत्यधिक सावधानी” का परिणाम बताया और कहा कि ईरान पिछले 49 वर्षों से अमेरिका और अन्य देशों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। हालांकि रुबियो ने इस बात से इंकार किया कि बमवर्षकों की अचानक वापसी सीधे इसी कथित ईरानी साजिश से जुड़ी है। इसके बावजूद एक NATO सैन्य सूत्र ने कहा कि ईरान से अमेरिकी परिसंपत्तियों को ब्रिटेन में “गंभीर खतरा” बना हुआ है। देखा जाये तो अमेरिकी बमवर्षकों की वापसी से अमेरिका की ईरान के खिलाफ यूरोप से तेजी से बमवर्षक अभियान चलाने की क्षमता घटेगी। रक्षा विशेषज्ञ क्रिस्टोफ बर्ग्स ने इस बारे में मीडिया से कहा है कि इससे ईरान के खिलाफ उड़ानों को तेजी से बढ़ाने की अमेरिकी क्षमता कुछ समय के लिए कम होगी। हालांकि Fairford से अमेरिकी कार्रवाई पहले ही ब्रिटिश अनुमति की सीमाओं से बंधी थी। अब अमेरिका वैकल्पिक रूप से डिएगो गार्सिया या खाड़ी क्षेत्र के ठिकानों की ओर देख सकता है। इससे दूरी और ईंधन संबंधी जरूरतें बदलेंगी, लेकिन खाड़ी के नजदीकी ठिकाने ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिहाज से अधिक उपयोगी भी साबित हो सकते हैं।

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