योगी सरकार गो संरक्षण को अब केवल धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण तक सीमित न रखकर वैज्ञानिक कृषि, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। सरकार संरक्षित गोमाता आधारित माइक्रो-आंत्रप्रेन्योरशिप मॉडल के जरिए प्रदेश में नई कृषि क्रांति की तैयारी कर रही है, जिसमें आईआईटी कानपुर की उन्नत तकनीक अहम भूमिका निभाएगी। प्रदेश की गोशालाओं को अब केवल पशु संरक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि जैविक कृषि और ग्रामीण विकास की नई ताकत के रूप में विकसित किया जाएगा। गोबर और गोमूत्र आधारित हाई-क्वालिटी जैविक उर्वरक तैयार करने की आधुनिक तकनीक आईआईटी कानपुर में विकसित की गई है, जिससे खेती को अधिक प्राकृतिक, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। आईआईटी कानपुर ने विकसित की उन्नत तकनीक
आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी स्कॉलर अक्षय श्रीवास्तव ने यह तकनीक विकसित की है। इस शोध का नेतृत्व अमिताभ बंध्योपाध्य कर रहे हैं। तकनीक के जरिए गोबर और गोमूत्र से वैज्ञानिक तरीके से उच्च गुणवत्ता वाला ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, खेती की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
माइक्रो-आंत्रप्रेन्योरशिप मॉडल से गांवों को नई ताकत
योगी सरकार इस तकनीक को माइक्रो-आंत्रप्रेन्योरशिप मॉडल से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके तहत ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को छोटे स्तर की फर्टिलाइजर यूनिट्स से जोड़ा जाएगा। इससे गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार की योजना है कि गोशालाओं में तैयार जैविक उत्पाद सीधे किसानों तक पहुंचें और गांव स्तर पर ही उत्पादन, बिक्री और आय का मजबूत आर्थिक चक्र तैयार हो। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
गोशालाओं से जुड़ेगा नया आर्थिक मॉडल
प्रदेश की गोशालाओं को जैविक कृषि, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास के नए मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हुआ तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि योगी सरकार गो संरक्षण को वैज्ञानिक कृषि और रोजगार से जोड़कर ऐसा मॉडल विकसित कर रही है, जो भविष्य में पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकता है।
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