मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को उच्चस्तरीय बैठक में इस वर्ष एक दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हर विद्यार्थी को कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया, वहीं प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में न्यूनतम पांच सहजन के पौधे लगाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को 30 मई तक अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रविवार को वृहद पौधरोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कि वृक्षारोपण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए। जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकेगा। उन्होंने गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण को प्राथमिकता देने को कहा।
साथ ही नदियों के किनारे 4.35 करोड़ पौधों के रोपण की भी तैयारी की जा रही है। उन्होंने शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर वन और वाटिकाएं विकसित करने, हाइवे और नदियों के किनारे वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। साथ ही अयोध्या में रामायणकालीन प्रजातियों के पौधे लगाने पर विशेष जोर दिया। बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को ”शेखा झील पक्षी विहार, अलीगढ़” के रामसर साइट घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र भी सौंपा गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 12 रामसर स्थल नामित किए जा चुके हैं, जो कुल 38,992.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित करते हैं। शेखा झील पक्षी विहार रामसर स्थल 40.309 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे छोटा रामसर स्थल है। 2016 में इसे पक्षी विहार के रूप में अधिसूचित किया गया था।
वैज्ञानिक और तकनीक आधारित होगा अभियान
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 का पौधरोपण अभियान पूरी तरह वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने माइक्रो प्लानिंग को इसकी आधारशिला बताते हुए ग्रामीण और शहरी स्तर पर तैयार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। पौधों की गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग की नर्सरियों से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में 1935 नर्सरियां संचालित हैं और 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिए 34 नई नर्सरियां भी स्थापित की गई हैं।
जीवितता पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल पौधरोपण ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और जीवितता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए ‘हरीतिमा’ ऐप, जीआईएस मैपिंग, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग, प्लांटेशन मॉनीटरिंग सिस्टम और नर्सरी मैनेजमेंट सिस्टम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2025 के सर्वेक्षण में पौधों की जीवितता दर 80 प्रतिशत दर्ज की गई है।
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