बलरामपुर अस्पताल के 157वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि, इसके लिए प्रस्ताव तैयार करें सरकार संसाधन उपलब्ध कराएगी। मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। उप मुख्यमंत्री ने राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और डीजी परिवार कल्याण डॉ. पवन कुमार अरुण के साथ समारोह का शुभारंभ करने के बाद अस्पताल में डायलिसिस यूनिट, सोलर पैनल और वार्ड-11 में नवीन लिफ्ट का लोकार्पण भी किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बलरामपुर अस्पताल स्वर्णिम इतिहास का साक्षी है। यहां के डॉक्टर और कर्मचारी टीम भावना के साथ काम करते हैं और हर मरीज को परिवार का सदस्य मानकर सेवा देते हैं, लेकिन ध्यान रखें कोई भी मरीज बिना इलाज के न लौटे। इसके लिए गेट पर दो कर्मचारियों की तैनाती की जाए, जो मरीजों को भर्ती प्रक्रिया में मदद करें। बेड खाली न होने की स्थिति में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था कर इलाज सुनिश्चित किया जाए। इस अस्पताल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता समेत कई विशिष्ट हस्तियों ने इस अस्पताल में इलाज कराया है। अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या ने अस्पताल की प्रगति रिपोर्ट पेश की। डीजी प्रशिक्षण डॉ. एचडी अग्रवाल, सीएमओ डॉ. एनबी सिंह, सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, एमएस डॉ. देवाशीष शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और चिकित्सक मौजूद रहे।
आईसीयू व्यवस्था में करें सुधार, डायलिसिस वोटिंग भी खत्म करें
उपमुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को आईसीयू व्यवस्था में सुधार और डायलिसिस की वेटिंग समाप्त करने के निर्देश दिए। अस्पताल की बुकलेट में डायलिसिस के लिए पांच दिन की प्रतीक्षा का उल्लेख मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। हालांकि बाद में सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि अब डायलिसिस के लिए किसी मरीज को इंतजार नहीं करना पड़ता और उसी दिन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उपमुख्यमंत्री ने डायलिसिस यूनिट के और विस्तार के निर्देश दिए।
हमें बलरामपुर अस्पताल पर भरोसा अधिक
राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि शहर के बड़े चिकित्सा संस्थान केजीएमयू, लोहिया, पीजीआई समेत अन्य के बीच बलरामपुर अस्पताल ने खुद को स्थापित कर रखा है। मरीजों का भी इस अस्पताल पर विश्वास बढ़ा है। मैं अपने घरवालों से कहूंगा कि यदि मैं बीमार पड़ू तो लोहिया और बलरामपुर ले जाएं। केजीएमयू और पीजीआई कभी न ले जाएं। हमें डर बैठ गया है, मेरे परिवार के दो तीन लोग गए वापस नहीं आए। मंत्री बनने के बाद दो बार बीमार पड़ा। एक बार बलरामपुर और लोहिया में इलाज हुआ।
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