सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि रेशम उद्योग आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में सशक्त आधार बनकर उभरा है। रेशम उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि, किसानों-बुनकरों को सीधी आर्थिक मजबूती और पारदर्शी योजनाओं के जरिए आजीविका का भरोसेमंद साधन बन चुका है। वे मंगलवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सिल्क एक्सपो–2026 का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। इस दौरान ‘रेशम मित्र–2025’ पत्रिका का विमोचन किया गया और रेशम उद्योग से जुड़े उत्पादकों, बुनकरों और उद्यमियों को पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। मंत्री राकेश सचान ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार का लक्ष्य अगले दस वर्षों में करीब 13,500 रेशम उत्पादकों को लाभ पहुंचाने का है। उन्होंने बताया कि अब तक 1630 लाभार्थियों को 32.49 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की जा चुकी है, जिससे रेशम उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में 9,000 एकड़ क्षेत्र में शहतूत पौधरोपण किया जा रहा है, जिससे 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अवसर पर मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग ने ऐतिहासिक प्रगति की है। वर्ष 1988 में जहां रेशम उत्पादन मात्र 27 मीट्रिक टन था, वह आज बढ़कर 450 से 500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह प्रगति आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में एक मजबूत कदम है और गरीब व पिछड़े वर्ग के लोगों को आय व रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रही है। आईजीपी के मरकरी हॉल में आयोजित सिल्क एक्सपो–2026 में देश के विभिन्न राज्यों से आए बुनकर और व्यापारी हाथ से बने शुद्ध रेशमी वस्त्र, साड़ियां, दुपट्टे और अन्य उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर रहे हैं। यह प्रदर्शनी 6 फरवरी 2026 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी और प्रदेश के रेशम उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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