प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि की चुनौती को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व-प्रबंधन की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतने ही प्रभावी ढंग से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने सतर्कता, विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्यों को सफल बाढ़ प्रबंधन की मूल कुंजी बताया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और सफाई कार्य तय समयसीमा में अनिवार्य रूप से पूरे किए जाएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रबंधन केवल आपदा के समय की कार्रवाई नहीं, बल्कि पूर्व तैयारी का विषय है, जिसमें तकनीक, निगरानी और जमीनी समन्वय की अहम भूमिका है। बैठक में प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने अवगत कराया कि प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा), राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन से जुड़े जनपद बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। वर्षा पैटर्न और नदी प्रवाह के विश्लेषण के आधार पर इस वर्ष 12 जनपदों के 18 तटबंधों को संवेदनशील तथा 11 जनपदों के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है। संवेदनशील तटबंधों की कुल लंबाई 241.58 किमी तथा अति संवेदनशील तटबंधों की कुल लंबाई 464.92 किमी है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा और मरम्मत कार्य प्राथमिकता पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलनिकासी को सुचारु रखने के लिए ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग का अभियान तेज किया गया है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई लगभग 60,047 किलोमीटर है। कई महत्वपूर्ण ड्रेनों की सफाई पूरी कर ली गई है, जबकि शेष कार्य निर्धारित समय में पूर्ण किए जा रहे हैं, ताकि मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति न बने। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं। इससे नदी प्रवाह में सुधार होगा और तटीय क्षेत्रों में कटान एवं जलभराव की समस्या कम होगी। साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन बाढ़ से बचाव का व्यवस्थित और दीर्घकालिक समाधान है। जहां नदी की मुख्य धारा में सिल्ट अधिक हो और नदी उथली हो गई हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए। केवल आवश्यकता पड़ने पर ही तटबंध या अन्य कटान-निरोधी उपाय अपनाए जाएं। उन्होंने सभी तटबंधों, बैराजों और संवेदनशील स्थलों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए। ड्रोन मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय के जरिए सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
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