पिछले चार दिन से मौसम में हो रहे बदलाव के साथ जिले में तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। तीन दिनों में तापमान में करीब चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। न्यूनतम तापमान 10 डिग्री और अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। आने वाले दिनों में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। तापमान में आई इस तेजी का असर सबसे ज्यादा सरसों की फसल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जिले में इस वर्ष 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की गई है, जो इस समय दाने बनने की महत्वपूर्ण अवस्था में है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की फसल के लिए दाना भराव की अवस्था में 18 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अनुकूल माना जाता है। इससे अधिक तापमान होने पर फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते। यदि तापमान में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो सरसों की पैदावार घट सकती है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है वे खेतों की नियमित निगरानी कर आवश्यकता अनुसार सिंचाई कर तापमान के प्रभाव को कम करने का प्रयास करें। किसान पप्पू गुप्ता ने बताया कि इस समय सरसों की फसल दाना भरने की अवस्था में है, लेकिन अचानक बढ़ते तापमान से हमें फसल को पूरी तरह से नुकसान पहुंचने की आशंका है। अगर मौसम ऐसा ही रहा तो पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा। किसान जागन लाल मौर्य के मुताबिक खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। पिछले कुछ दिनों में तापमान में इजाफा हुआ है। पहले ठंड के कारण फसल अच्छी लग रही थी। अगले कुछ दिनों में तापमान और बढ़ा तो लागत निकलना भी मुश्किल हो सकता है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. रितुषा तिवारी ने बताया कि सरसों की फसल के लिए इस समय ठंडे वातारण की जरूरत है। पिछले चार दिनों से तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम सामान्य हो सकता है। तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो सरसों की फसल पर सीधे तौर पर असर पड़ेगा।
किसानों को सलाह
खेत में नमी बनाए रखें, तापमान अधिक होने पर सुबह या शाम के समय सिंचाई बेहतर रहती है, फसल पर कीट और रोगों की निगरानी रखें, क्योंकि गर्मी में इनका प्रकोप बढ़ सकता है।
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