22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुई ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही भक्त आस्था में उपहारों को अर्पित कर रहे है। दूसरे वर्ष पूरा होने पर बृहस्पतिवार को ओडिशा से चल कर अयोध्या पहुंचे पंचधातु से निर्मित 286 किलोग्राम की दिव्य कोदंड श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अर्पित किया गया, जिसे मंदिर निर्माण समिति के महासचिव चंपत राय ने विधिवत स्वीकार किया। इस यात्रा के प्रभारी संतोष कुमार विश्वाल ने बताया कि यह ऐतिहासिक कोदंड 3 जनवरी को ओडिशा के राउरकेला से सनातन जागरण मंच के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा के साथ रवाना हुआ था। जो ओडिशा के सभी 30 जिलों से होते हुए 19 जनवरी को यह कोदंड पुरी पहुँचा। जहाँ भगवान जगन्नाथ के दर्शन कराए गए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 22 जनवरी को अयोध्या धाम में इसका आगमन हुआ। यह कोदंड पंचधातु सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता और लोहे से निर्मित है। इसके निर्माण में तमिलनाडु के कांचीपुरम की 48 महिला कारीगरों ने करीब आठ महीने तक अथक परिश्रम किया। यह प्रयास नारीशक्ति, भारतीय शिल्पकला और समर्पण की अद्वितीय मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। कहा कि कोदंड पर भारतीय सेना की वीरता और बलिदान की गाथाएँ भी कलात्मक रूप से उकेरी गई हैं। जिनमें कारगिल युद्ध सहित कई शौर्य प्रसंग शामिल हैं। इस प्रकार यह कोदंड केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक एकता और सनातन चेतना का भी सशक्त संदेश देता है।
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