हवाई सफर करने वालों के लिए आने वाले दिनों में टिकट महंगे होने की आशंका बढ़ गई है। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श ने कहा है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी के पास हवाई किराया बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। कंपनी के ईंधन खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उसकी कमाई पर दबाव पड़ रहा है। हालांकि, इंडिगो ने खर्च कम करने के लिए अपने स्तर पर दूसरे उपाय जारी रखने की बात भी कही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन को लगातार तीसरी तिमाही में घाटा हुआ है। जुलाई से सितंबर की तिमाही में कंपनी का शुद्ध घाटा 1,879 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कम है और बाजार के जानकारों के 2,063 करोड़ रुपये के औसत अनुमान से भी नीचे रहा। इसके बावजूद ईंधन पर बढ़ते खर्च ने कंपनी की कमाई को प्रभावित किया है। इस दौरान कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 26,188 करोड़ रुपये पहुंच गया। विली वॉल्श ने कहा कि आने वाले कुछ समय तक ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। उन्होंने माना कि कंपनी के सामने ईंधन खर्च में बड़ी बढ़ोतरी की चुनौती है। इंडिगो इस बढ़े हुए खर्च के असर को कम करने के उपायों पर काम करती रहेगी। हालांकि, खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी को पूरी तरह संभालना आसान नहीं है। ऐसे में यात्रियों पर इसका कुछ बोझ पड़ सकता है इंडिगो पहले ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ा चुकी है। यह बदलाव 6 अक्टूबर से लागू हुआ था। कंपनी के मुताबिक, विमानन ईंधन की मासिक कीमत में 14% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे इसकी कीमत पिछले 10 वर्षों के ऊंचे स्तरों में पहुंच गई थी। नई व्यवस्था के तहत घरेलू उड़ानों पर दूरी के अनुसार 375 रुपये से 1,300 रुपये तक ईंधन शुल्क लिया जा रहा है। अलग-अलग मार्गों पर शुल्क में 100 रुपये से 350 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह फिस गंतव्य के हिसाब से 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक है। यूरोप जाने वाली उड़ानों पर 10,000 रुपये, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी क्षेत्र और पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों के लिए 5,500 रुपये का ईंधन शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे यात्रियों को टिकट खरीदते समय पहले के मुकाबले ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, कंपनी की कमाई में कुछ सुधार भी देखने को मिला है। जुलाई-सितंबर तिमाही में इंडिगो का राजस्व 26% बढ़कर 23,364 करोड़ रुपये हो गया, जो बाजार के अनुमानों से अधिक था। लेकिन ईंधन खर्च में सालाना आधार पर 67% की बढ़ोतरी हुई और यह करीब 1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वॉल्श के अनुसार, सितंबर तिमाही में आमतौर पर यात्रा की मांग कम रहती है। इस बार ऊंचे ईंधन खर्च और भू-राजनीतिक तनाव ने दबाव और बढ़ा दिया। इस दौरान इंडिगो ने 2.75 करोड़ यात्रियों को सफर कराया, जो पिछले साल की समान अवधि से 4.5% कम है। कंपनी ने खर्च संभालने के लिए अपनी उड़ान क्षमता में भी 1% की कटौती की। प्रति यात्री औसत कमाई 34% बढ़ी, लेकिन विमानों की उपलब्ध सीटों में से भरी सीटों का अनुपात घटकर 80.3% रह गया, जो एक साल पहले 82.5% था। कंपनी का कर्ज पिछली तिमाही के मुकाबले 7.1% बढ़कर 87,303 करोड़ रुपये हो गया है। गौरतलब है कि भारत में सितंबर के आसपास हवाई यात्रा की मांग आमतौर पर कमजोर रहती है, जबकि त्योहारों के दौरान इसमें सुधार की उम्मीद होती है। इंडिगो को दिसंबर तिमाही में अपनी उड़ान क्षमता में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की चाल के कारण ईंधन खर्च पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में आने वाले समय में हवाई टिकटों की कीमतें इस बात पर निर्भर करेंगी कि ईंधन कितना महंगा रहता है और कंपनियां बढ़े हुए खर्च का कितना हिस्सा यात्रियों से वसूल पाती हैं।
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