उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में माटीकला महोत्सव-2026 का शुभारंभ हो गया है। बुधवार को मंत्री राकेश सचान ने खादी भवन में फीता काटकर महोत्सव की शुरुआत की। सरकार का जोर मिट्टी के पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक, रोजगार और कारोबार से जोड़ने पर है। मिट्टी के दीये, बर्तन, खिलौने और सजावटी सामान बनाने वाले कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए राजधानी लखनऊ में माटीकला महोत्सव-2026 शुरू हो गया है। बुधवार, 28 अक्टूबर को खादी भवन में प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने फीता काटकर महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल महोत्सव में मिट्टी के उत्पादों की बिक्री पिछले साल से भी अधिक होगी। पिछले वर्ष इस महोत्सव में पांच करोड़ रुपये से अधिक के उत्पाद बिके थे। इस बार भी अच्छी बिक्री की उम्मीद है। महोत्सव का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को अपने उत्पाद दिखाने और बेचने का अवसर देने के साथ माटीकला को रोजगार और स्वरोजगार का बेहतर जरिया बनाना है।
कारीगरों को मिले आधुनिक उपकरण
महोत्सव के शुभारंभ के मौके पर पांच कारीगरों को मुफ्त विद्युत चालित चाक दिए गए। इसके अलावा दो कारीगरों को पगमिल मशीनें दी गईं, जिनसे मिट्टी गूथने का काम आसान होता है। मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत लखनऊ की श्रेया को दो लाख रुपये के बैंक ऋण का चेक भी दिया गया। सरकार का मानना है कि आधुनिक मशीनों और तकनीकी प्रशिक्षण की मदद से कारीगर कम मेहनत में बेहतर उत्पादन कर सकेंगे। इससे उन्हें बाजार की जरूरत के मुताबिक उत्पाद तैयार करने और अपनी कमाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
48 हजार से ज्यादा परिवार चिन्हित
प्रदेश सरकार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के गठन के बाद से अब तक 48,048 कारीगर परिवारों की पहचान की गई है। बोर्ड का गठन 19 जुलाई 2018 को किया गया था। कारीगरों को मिट्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 39,468 माटीकला कारीगरों को मिट्टी निकासी के पट्टे भी आवंटित किए गए हैं। कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए अब तक 18,432 विद्युत चालित चाक बांटे जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,740 और चाक वितरित करने का लक्ष्य है। इसके अलावा मिट्टी गूथने के लिए 675 पगमिल मशीनें दी गई हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 300 और मशीनें बांटने की योजना है।
रोजगार के लिए मिल रही मदद
मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों को अपना काम शुरू करने और कारोबार बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार के अनुसार, पिछले सात वर्षों में 1,333 लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत कराकर माटीकला इकाइयां स्थापित कराई गई हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मार्च 2027 तक 300 और इकाइयां स्थापित कराने का लक्ष्य रखा गया है। कारीगरों को काम की बारीकियां सिखाने और कारोबार चलाने में मदद देने के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं। पिछले सात वर्षों में 18,432 लोगों को आधुनिक उपकरण चलाने, 1,333 लोगों को उद्यम संचालन और 7,836 लोगों को शिल्पकारी का प्रशिक्षण दिया गया है।
10 जिलों में बने सुविधा केंद्र
माटीकला से जुड़े कारीगरों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रदेश के 10 जिलों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनमें पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन शामिल हैं। इसके अलावा मूर्तियां बनाने के लिए 603 जोड़ी पीओपी डाई, पेंटिंग के लिए 31 मशीनें और दीये बनाने के लिए 81 मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं का मकसद कारीगरों को उत्पादन में मदद देना और उनके उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
बिक्री का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद
मंत्री राकेश सचान ने कहा कि माटीकला महोत्सव कारीगरों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर देता है। पिछले साल पांच करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हुई थी। इस बार इससे ज्यादा बिक्री होने की उम्मीद है। शुभारंभ कार्यक्रम में विद्युत चालित चाक के लिए लखनऊ के शिवा प्रजापति, राम खेलावन, नन्हा, अजय और गायत्री को लाभान्वित किया गया। पगमिल मशीन के लिए रमेश कुमार और दिलीप कुमार को चुना गया। वहीं, मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत डालीगंज के मुंशीगंज निवासी श्रेया को दो लाख रुपये का ऋण चेक दिया गया। कार्यक्रम में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा सार्वजनिक उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव अनिल सागर और उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिशिर भी मौजूद रहे।
GDS Times | Hindi News Latest News & information Portal