विजयादशमी के अवसर पर पूरे देश में धूम है। पूरब से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक, हर जगह विजयादशमी के त्यौहार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। पटना, मुंबई, हिसार, चंडीगढ़, दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या, भोपाल, नागपुर जैसे शहरों में रावण दहन किया जा रहा है। दिल्ली में भी भव्य तरीके से अलग-अलग जगह पर दशहरे का कार्यक्रम रखा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारका पहुंची हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली में दशहरा महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। ऊधर नवरात्रि के दौरान 4 लाख से ज्यादा भक्तों ने कटरा में माता वैष्णो देवी मंदिर में दर्शन किए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दशहरा समारोह में कहा कि सभी को दशहरा के महापर्व पर बहुत-बहुत बधाई। ये त्योहार अधर्म और अन्याय पर धर्म और न्याय की विजय का उत्सव है। उन्होंने कहा कि दशहरा के अवसर पर देश-विदेश के अनेक स्थानों पर आयोजित रामलीलाओं के माध्यम से करोड़ों लोग राम कथा के महान आदर्शों को याद करते हैं। वही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं सभी देशवासियों को विजयादशमी की बधाई देता हूं। आज भारत का कोना-कोना राममय है गांव-गांव शहर-शहर रामलीला के रास में देश डूबा हुआ है। देशभर में रामलीलाओं का मंचन प्रभु श्री राम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक का अंत का उद्घोष और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं है। ये भारत की प्राण ऊर्जा है। मोदी ने कहा कि इस देश ने, इसकी संस्कृति ने और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है। ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षस राज रावण का अंत किया था। ये आस्था इसलिए भी है क्योंकि प्रभु राम ने हमें ऐसे आदर्श दिए जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय है।जो आज भी सुशासन का मानदंड माना जाता है। रामराज्य अर्थात् ऐसा शासन, जहाँ किसी के प्रति भेदभाव न हो, जहाँ सभी को न्याय मिले, जहाँ समान अवसर प्राप्त हों और जहाँ सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण हो… यही प्रभु श्रीराम का आदर्श है। इसलिए हमें हमेशा जनता को जनार्दन मानकर नागरिक देवो भव: के मंत्र पर आगे बढ़ना है। हमें गरीब, वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है। मोदी ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो… हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना है। हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है।हमें संसाधनों पर विश्वास करना है। अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है। क्योंकि प्रभु श्रीराम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकती। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था, इसलिए रामजी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया। यही सफलता का मूलमंत्र है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और सभी से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के उदात्त आदर्शों को बनाए रखने तथा समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने एक संदेश में कहा, ‘‘विजयादशमी के पर्व का विशेष महत्व है। यह भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम को धर्मपरायणता और नैतिक आचरण के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व अधर्म और अन्याय पर धर्म और न्याय की जीत का उत्सव है।’’ राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘‘इस अवसर पर आइए, हम अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के उदात्त आदर्शों को बनाए रखने तथा समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लें।’’
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