दिल्ली में लगातार हो रहे प्रदर्शनों और मार्च के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और देश की छवि प्रभावित करने वाली घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस समेत देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर अलग-अलग संगठनों से जुड़े 500 से ज्यादा लोग हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान और अन्य देशों से संचालित किए जा रहे बताए जा रहे सोशल मीडिया हैंडल और नई दिल्ली के कई इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस की खुफिया इकाई स्पेशल ब्रांच भी इस पूरी कवायद में सक्रिय है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन और भीड़ जुटाने से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री की भी निगरानी की जा रही है।
जेन-जी 1.0 आंदोलन से लिया सबक
दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क विभाग (पीआरओ) ने जेन-जी 1.0 आंदोलन के अनुभवों को देखते हुए सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पुलिस का परसेप्शन मैनेजमेंट विंग ऐसे अभियान का मुकाबला करने में जुटा है, जिसे अधिकारी साइबर वॉरफेयर अभियान के तौर पर देख रहे हैं। दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस अभियान का मकसद जुलाई में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की नकारात्मक छवि पेश करना था। पुलिस अब अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से सामने रखने के लिए सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रियता दिखा रही है।
जुलाई के प्रदर्शन के कंटेंट की हो रही समीक्षा
पुलिस ने जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान अपने सोशल मीडिया कंटेंट की समीक्षा भी शुरू कर दी है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पुलिस की ओर से जारी किए गए पक्ष को उस दौरान अपेक्षित ट्रैक्शन क्यों नहीं मिला। एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस मेटा, एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम किस तरह कंटेंट को अधिक लोगों तक पहुंचाते हैं और पुलिस के आधिकारिक कंटेंट की पहुंच कैसे बढ़ाई जा सकती है।
पुलिसकर्मियों के घायल होने के वीडियो किए जा रहे पोस्ट
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल से प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो साझा किए गए हैं। इनमें प्रदर्शन के दौरान घायल पुलिसकर्मियों, फटी वर्दी और बैज, गिरने के बाद महिला अधिकारी को दी जा रही मदद और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों की धक्का-मुक्की या प्रतिरोध जैसी घटनाएं दिखाई गई हैं। इन वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बयान और घटनाओं को लेकर उनके आकलन भी शामिल हैं। पुलिस के एक अधिकारी का दावा है कि इस बार दिल्ली पुलिस फर्जी और भ्रामक वीडियो के प्रसार को रोकने में काफी हद तक सफल रही है।
500 से ज्यादा लोगों की पहचान
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, कम से कम 500 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो विरोध प्रदर्शन और लोगों को जुटाने की गतिविधियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस सूची में सीजेपी की कोर टीम के सदस्य, समर्थक और संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस सूची में घरेलू कामगार, ड्राइवर और अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस करीब 100 ऐसे लोगों की निगरानी कर रही है, जो खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताते हैं।
दिशा समेत कई सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में
दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट के एक अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तान समेत कई देशों से भारतीय पहचान के साथ सोशल मीडिया हैंडल चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि इन हैंडल के जरिए माहौल खराब करने के उद्देश्य से फर्जी और भ्रामक पोस्ट प्रसारित की जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अनुजश्री तिवारी नाम का भारतीय हैंडल पाकिस्तान से संचालित किए जाने की बात सामने आई है। अब दिशा समेत तीन से चार अन्य हैंडल की भी जांच की जा रही है और इस संबंध में गूगल से जानकारी मांगी गई है।
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