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एमिटी में नैनोटेक्नोलॉजी और मॉडर्न मेडिसिन पर महामंथन शुरू, जानकारी साझा करने जुटे देश- दुनिया के दिग्गज

आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में नवीन दवा खोज पद्धतियों, नैनोटेक्नोलॉजी और उन्नत चिकित्सीय तकनीकों में हो रहे विकास पर चर्चा के लिए एमिटी विश्वविद्यालय में आज देश-विदेश के दिग्गज जुटे हैं। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की तरफ से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में नेक्स्ट जेनरेशन थेराप्यूटिक्स- इंटीग्रेटिंग नैनोटेक्नोलॉजी विद एडवांस्ड ड्रग डिस्कवरी प्लेटफॉर्म्स पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किये हैं। मंगलवार को शुरू हुये इस सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शिक्षाविद, चिकित्सक, फार्मास्युटिकल शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ, नियामक विशेषज्ञ के अलावा युवा शोधकर्ता शामिल हुये। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि एनआईपीईआर रायबरेली की निदेशक प्रो. (डॉ.) शुभिनी ए. सराफ ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, विंग कमांडर (डॉ.) अनिल तिवारी (सेवानिवृत्त), डिप्टी प्रो वाइस चांसलर, एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर तथा प्रो. (डॉ.) सत्य प्रकाश सिंह, प्रिंसिपल एवं डिप्टी डायरेक्टर, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी भी मंच पर मौजूद रहे।
सस्ती दवाएं, बेहतर इलाज
सम्मेलन में प्रो. (डॉ.) शुभिनी ए. सराफ ने कहा कि भारत में दवाओं की किफायती उपलब्धता आज भी एक चुनौती है। हमें ऐसी दवाएं विकसित करने की आवश्यकता है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें। यह तभी संभव होगा, जब सस्ती और प्रभावी दवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। प्रो. सराफ ने प्रयोगशालाओं में होने वाली खोजों को सफल चिकित्सीय उपचार में परिवर्तित करने की मौजूदा चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने नेक्स्ट जेनरेशन थेराप्यूटिक्स, ड्रग सिंथेसिस, फोटोस्टेबल क्वांटम डॉट्स तथा नैनो मेडिसिन के वैधीकरण के लिए ऑर्गन-ऑन-ए-चिप तकनीक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव शरीर के लिए प्रभावी दवा पहुंचाने वाली प्रणाली का विकास वर्तमान स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) शुभिनी ए. सराफ ने सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन भी किया।
शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए ज्ञान साझा करने का बड़ा मंच है यह सम्मेलन
एमिटी विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने कहा कि नैनोटेक्नोलॉजी ने, कम्प्यूटेशनल ड्रग डिजाइन, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास ने आधुनिक चिकित्सा के स्वरूप को बदल दिया है। इन तकनीकों के एकीकरण से रोगों के निदान, शरीर में दवा पहुंचाने की प्रक्रिया और दवाओं की प्रभावशीलता में सुधार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों को ज्ञान साझा करने तथा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास को समझने का उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य नवीन चिकित्सीय समाधानों के विकास के लिए वैज्ञानिक विमर्श को बढ़ावा देना, विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना तथा युवा शोधकर्ताओं को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती दवाओं के विकास की दिशा में अनुसंधान के लिए प्रेरित करना है। इस अवसर पर एमिटी के विभिन्न संस्थानों के प्रमुख, विभागाध्यक्ष, सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) विवेक श्रीवास्तव, डॉ. शशांक सोनी एवं डॉ. राहुल मौर्य सहित शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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