‘हैवान’ अक्षय कुमार और सैफ अली खान दोनों के करियर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि यह सिर्फ दो बड़े सितारों की साथ में वापसी वाली फिल्म नहीं, बल्कि अपनी तरह की एक अलग और फ्रेश कहानी लेकर आती है। फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प होने के साथ-साथ ऐसा है, जिसे हिंदी सिनेमा में बार-बार एक्सप्लोर नहीं किया गया है। एक तरफ है नेत्रहीन श्याम, जिसकी दुनिया आंखों के बजाय आवाज, एहसास और इंस्टिंक्ट से चलती है, तो दूसरी तरफ है परशुराम, जिसका रहस्य और खौफ हर पल कहानी को एक नई दिशा देता है। दोनों के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ हीरो और विलेन की भिड़ंत नहीं, बल्कि दिमाग, हिम्मत और सर्वाइवल का ऐसा खेल है, जहां एक छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है। प्रियदर्शन ने इसी यूनिक आइडिया को अक्षय कुमार और सैफ अली खान के बिल्कुल नए अवतार के साथ पर्दे पर उतारा है और यही वजह है कि ‘हैवान’ दोनों एक्टर्स के लिए एक ऐसी फिल्म बनकर सामने आती है, जो उनकी अब तक की इमेज को बदलने की ताकत रखती है।
‘हैवान’ की कहानी की सबसे दिलचस्प बात इसका बेसिक कॉन्सेप्ट है। यहां एक ऐसा शख्स है जो देख नहीं सकता, लेकिन उसके सामने खड़ा इंसान उसके लिए किसी भी वक्त सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। श्याम की दुनिया आवाजों, एहसास और अंदाजे से चलती है, जबकि परशुराम अपने इरादों को पढ़ने का कोई मौका नहीं देता। दोनों के बीच शुरू होने वाला संघर्ष धीरे-धीरे एक ऐसे चेज़ में बदल जाता है, जहां हर छोटी आहट मायने रखती है और किसी भी पल कहानी का रुख बदल सकता है। फिल्म आपको लगातार इस सवाल के साथ आगे ले जाती है कि आखिर इस खेल में बढ़त किसके पास है।
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