अगर आप लखनऊ, कानपुर या आगरा में रोजाना बस, ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन से सफर करते हैं, तो मेट्रो से जुड़ा यह अपडेट आपके लिए खास है। उत्तर प्रदेश के इन तीन बड़े शहरों में मेट्रो परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। इससे आने वाले समय में लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन, आसान कनेक्टिविटी और सफर में समय की बचत की उम्मीद है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप की बैठक में लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो सहित प्रमुख अवस्थापना परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को लंबित काम तेजी से पूरा करने और तय समयसीमा के साथ गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।
लखनऊ वालों के लिए क्या बदलेगा?
लखनऊ मेट्रो के कॉरिडोर-1बी से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम आगे बढ़ चुके हैं। बैठक में बताया गया कि डिटेल्ड डिजाइन कंसल्टेंट, मेट्रो डिपो, एलिवेटेड सेक्शन और लिफ्ट के टेंडर अवार्ड किए जा चुके हैं। भूमिगत सेक्शन के तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। वहीं, PSD, टेलीकॉम और AFC E&M सिस्टम से जुड़े टेंडर वित्तीय स्वीकृति के बाद फ्लोट किए जा चुके हैं। आम यात्रियों के लिए इसका मतलब है कि शहर में मेट्रो कनेक्टिविटी के विस्तार से आगे चलकर रोज के आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक और विकल्प मजबूत होगा। खासकर नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए रोज सफर करने वालों को इसका फायदा मिल सकता है।
कानपुर में नौबस्ता तक मेट्रो की राह आसान
कानपुर में मेट्रो परियोजना ने भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। कॉरिडोर-1 में झकरकट्टी-ट्रांसपोर्ट नगर के दो भूमिगत स्टेशनों का काम 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं बारादेवी-नौबस्ता खंड के पांच एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण 100 प्रतिशत पूरा बताया गया है। कानपुर सेंट्रल को छोड़कर कानपुर सेंट्रल-नौबस्ता खंड को 5 जुलाई 2026 को सीएमआरएस की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसका सीधा संबंध उन यात्रियों से है जिन्हें शहर के इस हिस्से से आने-जाने में सड़क यातायात पर निर्भर रहना पड़ता है। मेट्रो नेटवर्क बढ़ने पर सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने और रोजाना के सफर को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
कानपुर के दूसरे कॉरिडोर का भी काम आगे
कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में रावतपुर-डबल पुलिया खंड की सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है और इसकी भौतिक प्रगति 87.15 प्रतिशत बताई गई है। वहीं, सीएसए और विजय नगर से बर्रा-8 खंड की प्रगति 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यानी कानपुर में मेट्रो नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ाने का काम जारी है, जिसका मकसद शहर के ज्यादा इलाकों को तेज सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है।
आगरा में भी मेट्रो का काम तेजी से आगे
आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष भूमिगत हिस्से का संरचनात्मक काम पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग का काम चल रहा है और सीएमआरएस निरीक्षण भी पूरा हो चुका है। एलिवेटेड हिस्से में आईएसबीटी स्टेशन का निर्माण पूरा हो गया है, जबकि दो अन्य स्टेशनों पर काम जारी है। कॉरिडोर-2 में आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक 14 एलिवेटेड स्टेशनों और वायाडक्ट का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। आगरा में मेट्रो का विस्तार स्थानीय लोगों के साथ-साथ शहर में आने वाले पर्यटकों के लिए भी अहम है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने से प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन आसान हो सकता है।
चिल्ला रेगुलेटर-महामाया फ्लाईओवर भी रफ्तार पर
गौतमबुद्धनगर की चिल्ला रेगुलेटर-महामाया फ्लाईओवर एलीवेटेड रोड परियोजना की भी समीक्षा की गई। इसकी भौतिक प्रगति 65.50 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 54.96 प्रतिशत बताई गई है। परियोजना का पहला माइलस्टोन दिसंबर में हासिल किया जा चुका है। एलीवेटेड रोड जैसी परियोजनाएं भी रोजाना सड़क से सफर करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर यातायात के दबाव को कम करना और कनेक्टिविटी बेहतर करना है।
सिर्फ मेट्रो नहीं, रोजगार योजना पर भी जोर
बैठक में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि 76 प्रतिशत पात्र प्रतिष्ठान पंजीकरण करा चुके हैं। मुख्य सचिव ने बाकी पात्र प्रतिष्ठानों का पंजीकरण कराने और योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। पात्र प्रतिष्ठानों को पंजीकरण प्रक्रिया में सहयोग देने पर भी जोर दिया गया।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी बात क्या?
लखनऊ, कानपुर और आगरा की इन परियोजनाओं का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार मतलब रोज दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, कॉलेज जाने वाले छात्र, कारोबार के लिए सफर करने वाले लोग और शहर में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए परिवहन के ज्यादा विकल्प। अगर परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो लोगों को लंबी दूरी के सफर में सुविधा मिलने के साथ सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। यही वजह है कि इन परियोजनाओं की प्रगति आम शहरवासियों के लिए सीधे मायने रखती है।
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