ओडिशा के पुरी में तीन जून से पांच जून तक आयोजित होने वाली ब्रिक्स के आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) समूह की दूसरी तकनीकी बैठक में 11 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। राज्य के एक मंत्री ने यह जानकारी दी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने सोमवार को कहा कि ओडिशा को आपदा तैयारियों, चक्रवात प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के क्षेत्र में ”वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त उसकी उपलब्धियों” के कारण मेजबान राज्य के रूप में चुना गया है। पुजारी ने बताया कि भारत के अलावा ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि पुरी में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी चार जून को उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह पहली तकनीकी बैठक
भारत ने ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह की पहली तकनीकी बैठक की अध्यक्षता की थी। यह बैठक 29 और 30 अप्रैल को ऑनलाइन आयोजित की गई थी जिसमें सदस्य देशों ने आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाने से जुड़े साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी। पुजारी ने कहा, ”भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह की आमने-सामने (ऑफलाइन) की पहली तकनीकी बैठक तीन से पांच जून, 2026 तक पुरी में आयोजित की जाएगी।”
ब्रिक्स सदस्य देशों के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ इस बैठक में लेंगे हिस्सा
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ इस बैठक में हिस्सा लेंगे। मंत्री ने कहा कि बैठक में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सतत वित्तपोषण, मजबूत बुनियादी ढांचे, पूर्वानुमान आधारित प्रतिक्रिया और आपदा से निपटने की रणनीतियों में पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने पर चर्चा होगी। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे।
साल 2024 में इसका विस्तार, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE शामिल
इसका 2024 में विस्तार कर इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ। ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है। यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को साथ लाता है। यह समूह वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
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