केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को यहां एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें देश में संभावित बाढ़ और लू की स्थिति से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। सरकार के आपदा प्रबंधन के लिए अपनाए गए सक्रिय और निर्णायक ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ दृष्टिकोण की दिशा में यह बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। गृह मंत्रालय ने हाल के वर्षों में देश में आपदा प्रबंधन ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, एनडीआरएफ को सुदृढ़ बनाना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान शून्य जनहानि के दृष्टिकोण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। यह उच्च-स्तरीय समीक्षा सरकार की सक्रिय शासन, नागरिक-केंद्रित आपदा प्रबंधन और आपदा-रोधी भारत के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बैठक के दौरान गृह मंत्री केंद्र सरकार की एजेंसियों की तैयारियों का आकलन करेंगे साथ ही, किसी भी प्रकार की जनहानि न हो और संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, संसाधनों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री देश में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए किए जा रहे दीर्घकालिक उपायों की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। इन उपायों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा, नदी प्रबंधन की पहल और मौसम के पूर्वानुमान में वैज्ञानिक प्रगति शामिल हैं। साथ ही, केन्द्रीय गृह मंत्री पिछले वर्ष आयोजित की गई समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की भी जानकारी लेंगे, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और विभिन्न गतिविधियों का त्वरित एवं समन्वित निष्पादन हो सके। उच्च-स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से उन्नत प्रौद्योगिकी और वास्तविक डेटा एकीकरण के माध्यम से बाढ़ के पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने , एक साथ आने वाली आपदाओं, विशेष रूप से बाढ़ और लू जैसी चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को बढ़ाने ,जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाने, आवश्यक राहत सामग्री का पर्याप्त भंडार और चिकित्सा संबंधी तैयारियों को सुनिश्चित करने पर चर्चा की जायेगी।
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