पुरानी कहावत थी- पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब। लेकिन बदलते वक्त और उत्तराखंड सरकार की नई खेल नीति ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अब यहां का युवा मैदानों में पसीना बहाकर न केवल अपना भविष्य संवार रहा है, बल्कि देवभूमि का मान भी बढ़ा रहा है। इसी क्रम में, जिला खेल अधिकारी कार्यालय ने स्थानीय खिलाड़ियों को एक बड़ी सौगात दी है। विभाग ने वार्षिक शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को न केवल सरल बनाया है, बल्कि खिलाड़ियों को बड़ी आर्थिक राहत भी दी है। खेल विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यदि कोई शौकिया खिलाड़ी अपना वार्षिक शुल्क एकमुश्त जमा करता है, तो उसे 6 महीने के शुल्क की सीधी छूट दी जाएगी। यानी साल भर की सुविधाओं का लाभ अब आधे साल के प्रभावी शुल्क पर उठाया जा सकेगा। इस पहल का उद्देश्य जहां खिलाड़ियों पर वित्तीय बोझ कम करना ताकि वे संसाधनों का पूरा लाभ ले सकें वहीं, अधिक से अधिक युवाओं को नियमित अभ्यास और खेल गतिविधियों से जोड़ना भी है। इतना ही नहीं, समय पर शुल्क जमा होने से खेल परिसरों के रख-रखाव और संसाधनों को और बेहतर बनाया जा सकेगा। ऐसे में उत्तराखंड सरकार की खेल प्रोत्साहन नीतियों के अनुरूप, विभाग का यह कदम जिले में खेल संस्कृति को और मजबूत करेगा। सभी शौकिया खिलाड़ियों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर इस योजना का लाभ उठाएं और मैदान की ओर अपने कदम बढ़ाएं। जिला क्रीड़ाधिकारी निर्मला पंत ने बताया कि हमने यह निर्णय खिलाड़ियों की सुविधा और उनके उत्साहवर्धन को ध्यान में रखते हुए लिया है। एकमुश्त शुल्क पर 6 माह की छूट से आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और वे बिना किसी बाधा के अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे।
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