केजीएमयू में कमर्शियल गैस की आपूर्ति रुकने के कारण विश्वविद्यालय की भोजन व्यवस्था पर असर पड़ना शुरू हो गया है। बुधवार को गैस की कमी के चलते किचन में छोटे कमर्शियल सिलेंडर से काम चलाया गया है। गैस की यह दिक्कत करीब 4 दिनों से आना शुरू हुई है। केजीएमयू में 4 हजार से अधिक बेड हैं। अकेले
शताब्दी अस्पताल स्थित किचन में 2500 मरीजों के भोजन बनने की बात बताई जा रही है। वहीं मौजूदा समय में रोटियों की संख्या कम कर चावल की मात्रा बढ़ाई गई, ताकि मरीजों को पर्याप्त भोजन मिल सके। वहीं, हॉस्टलों में गैस खत्म होने के कारण छात्रों के लिए खाना तैयार नहीं हो सका। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके
सिंह ने बताया कि छात्रों के लिए अस्थायी रूप से कोयले पर खिचड़ी बनाने का सुझाव दिया गया, लेकिन अधिकांश छात्र बाहर खाना खाने का निर्णय लेने को मजबूर हुए। गैस आपूर्ति करने वालों से संपर्क किया गया, लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो सका। गुरुवार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। खुले
स्थान पर तंदूर लगाकर भोजन बनाने की योजना भी बनाई जा रही है, क्योंकि हॉस्टल के किचन में धुआं भरने का खतरा है। डॉ. केके सिंह ने बताया कि इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। जिला प्रशासन की तरफ से कल यानी गुरुवार को गैस की व्यवस्था करने की बात कही गई है।
भोजन व्यवस्था में बदलाव
-गैस की सीमित उपलब्धता के कारण रोटियों की संख्या घटा दी गई और चावल की मात्रा बढ़ा दी गई।
-सोलर कुकर का इस्तेमाल करके कुछ काम चलाया जा रहा है।
-छोटे-छोटे कैंटीन में हल्का नाश्ता और चाय इंडक्शन पर तैयार की जा रही है।
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