बिजली विभाग के सेवानिवृत्त और कार्यरत कर्मचारी न्यूनतम शुल्क पर मनमाने तरीके से बिजली का उपयोग नहीं कर पाएंगे। बिजली के दुरुपयोग और फिजूल खर्च राेकने के लिए पावर कारपोरेशन नई व्यवस्था को लागू करने जा रहा है। ज्यादातर कर्मियों के घरों में मीटर लगा दिए गए हैं, कुछ घरों में लगने हैं। अब कर्मचारियों को मीटर के आधार पर हर यूनिक का हिसाब देना होगा। लखनऊ में करीब 7,000 बिजली कर्मचारी हैं। इनमें से ज्यादातर के घरों में मीटर लग चुके हैं, दो हजार से अधिक कर्मचारियों के घरों में मीटर लगना बाकी है। इसी वित्तीय वर्ष में मीटर लग जाएंगे। मीटर लगने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों की बिजली खपत की निगरानी आम उपभोक्ताओं की तरह ही होगी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, मीटर लगाने वाली एजेंसी हर महीने बिजली खपत का पूरा ब्यौरा प्रबंधन को सौंपेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिजली का अनावश्यक उपयोग न हो और किसी तरह का दुरुपयोग तुरंत पकड़ में आ सके। इसके अलावा जो कर्मचारी मीटर लगाने का विरोध करेगा, वहां पुलिस की मदद से मीटर लगाया जाएगा। साथ ही इसे बिजली चोरी की आशंका माना जाएगा और उसके खिलाफ बिजली चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकेगी।
मीटर लगने के बाद यूनिट के हिसाब से कम भी होगा मासिक बिल
मध्यांचल निगम की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार मीटर लगने पर कर्मचारियों के मासिक बिल में कुछ कमी भी आएगी। उदाहरण के तौर पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का बिल लगभग 444 रुपये से घटकर करीब 311 रुपये, जबकि तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का 540 रुपये से घटकर लगभग 378 रुपये हो जाएगा। इसी तरह अवर अभियंता (जेई) का बिल 888 रुपये से घटकर लगभग 621.65 रुपये, सहायक अभियंता (एई) का 1092 रुपये से घटकर करीब 764.80 रुपये, और अधिशासी अभियंता (ईई) का 1167 रुपये से घटकर लगभग 815 रुपये हो जाएगा। वहीं अधीक्षण अभियंता और डीजीएम श्रेणी के अधिकारियों का बिल 1625 रुपये से घटकर करीब 1140 रुपये, जबकि मुख्य अभियंता और जीएम स्तर के अधिकारियों का बिल 1838 रुपये से घटकर लगभग 1290 रुपये रह जाएगा। हालांकि इन अधिकारियों और कर्मचारियों से एसी उपयोग का अलग चार्ज भी लिया जाता है, जो अप्रैल से सितंबर के बीच लगभग 650 रुपये प्रति माह होता है।
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