प्रदेश के किसानों की जल्द ही खेती की सिंचाई की समस्या हल होगी। यदि योजना के मुताबिक कार्य हुआ तो सूबे के करीब 3.67 लाख कृषि उपभोक्ताओं को दिन में नियमित बिजली आपूर्ति मिलने की संभावना है। इसके लिए सरकार ने अब तक लगभग 1708.1 मेगावाट क्षमता के 581 पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) को हरी झंडी दे दी है। यह पहल न केवल ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ करेगी, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने और प्रदेश को हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर साबित हो सकेगी।
कौशांबी और बिजनौर में लगाई गईं पायलट परियोजनाएं
राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, इस योजना के लिए केंद्र सरकार अधिकतम 1.05 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तथा राज्य सरकार 50 लाख रुपये प्रति मेगावाट की सहायता दे रही है। इस प्रकार कुल सहायता लगभग 1.55 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तक पहुंच रही है। कौशांबी और बिजनौर जिलों में स्थापित लगभग 3.3 मेगावाट की पायलट परियोजनाएं राज्य में व्यापक क्रियान्वयन के लिए मॉडल के रूप में देखी जा रहीं हैं। इन परियोजनाओं से प्राप्त अनुभव के आधार पर अन्य जिलों में भी सौर ऊर्जा कार्य को गति दी जा सकेगी।
डिस्काम को मिलेगी वित्तीय राहत
प्रधानमंत्री कुसुम सी-2 के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन से विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति में सकारात्मक सुधार होने की उम्मीद है। वर्तमान में कृषि क्षेत्र को रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के कारण डिस्कॉम पर उच्च सब्सिडी भार रहता है। स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन से पावर अनुरक्षण लागत घट सकती है और दिन के समय महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम हो सकती है।
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