सलाखों के पीछे सजा काट रहे बंदियों के हाथों से बना खुशबूनुमा हर्बल गुलाल इस होली पर भी अपना खास रंग बिखेरेगा। जेल में तैयार हो रहे इस गुलाल में इत्र के साथ-साथ जेल परिसर में उत्पादित गेंदा के फूल, हल्दी, पालक और चुकंदर के रस का उपयोग किया जा रहा है। यह हर्बल गुलाल त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित
बताया जा रहा है। जेल अधीक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि बंदियों की दिशा और दशा सुधारने के उद्देश्य से समय-समय पर उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण ‘निमदस’ संस्था के सहयोग से दिया जाता है। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी हर्बल गुलाल बनाने की पहल शुरू की गई है, ताकि रिहाई के बाद बंदी अपराध का रास्ता
छोड़ आत्मनिर्भर बन सकें। प्रभारी जेलर रंजू शुक्ला सिंह ने कहा कि गुलाल निर्माण से बंदी स्वावलंबी बन रहे हैं और उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी कौशल मिल रहा है। निमदस संस्था के प्रबंध निदेशक एस.के. वर्मा ने इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस
अवसर पर उप कारापाल अनिल सिंह, श्यामाशरण सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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