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यूपी में MSME, खादी और वस्त्र क्षेत्र को नई रफ्तार… लाखों उद्यमियों, कारीगरों और श्रमिकों के लिए नए अवसर

केंद्रीय बजट 2026–27 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा और वस्त्रोद्योग को सशक्त बनाने के लिए कई अहम और दूरगामी प्रावधान किए गए हैं। वस्त्र क्षेत्र के लिए एक व्यापक, एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है, जिसमें राष्ट्रीय फाइबर योजना, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स-इको पहल और समर्थ 2.0 जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन और निर्यात को गति देना है। मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना से उत्तर प्रदेश में निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
इन प्रावधानों से प्रदेश के एमएसएमई, खादी, हथकरघा, रेशम और वस्त्रोद्योग से जुड़े लाखों उद्यमियों, कारीगरों और श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा। रोजगार बढ़ेगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती देने के लिए ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही आत्मनिर्भर भारत फंड में ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी डाली जाएगी। छोटे उद्यमों की कार्यशील पूंजी की समस्या कम करने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम के दायरे का विस्तार किया जाएगा, जिससे समय पर भुगतान और वित्तीय तरलता सुनिश्चित होगी।
कॉरपोरेट मित्र और विरासत औद्योगिक क्लस्टर
‘कॉरपोरेट मित्र’ व्यवस्था के जरिए एमएसएमई को व्यावसायिक मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाजार से जोड़ने की पहल की गई है। इसके साथ ही देशभर में 200 विरासत इंडस्ट्रियल क्लस्टरों के कायाकल्प का प्रस्ताव है, जिनमें हथकरघा और हस्तशिल्प क्लस्टर भी शामिल होंगे। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जूते के ऊपरी हिस्सों के शुल्क-मुक्त आयात का विस्तार और चमड़ा व वस्त्र परिधान निर्यात की समय-सीमा बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। इनसे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिलेगी।
खादी एवं ग्रामोद्योग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती : मंत्री
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि बजट उद्योग, किसानों और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल का प्रस्ताव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा और कारीगरों-बुनकरों को स्थायी आजीविका देगा। इससे परंपरागत उद्योग आधुनिक बाजार से जुड़ेंगे और आय बढ़ेगी।

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