देवी सरस्वती को ज्ञान को विद्या की देवी कहा जाता है। सरस्वती मां की पूजा-अर्चना करने से जातक को बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिलता है। मां सरस्वती की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन अगर आप मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ ही कुछ विशेष मंत्रों का जाप करते हैं, तो ज्ञान की देवी सरस्वती हमसे प्रसन्न होती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सरस्वती पूजा के नियम और मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं।
संकल्प मंत्र
सरस्वती पूजा करने से पहले हाथ में फूल, तिल, अक्षत, मिठाई और फल लेकर ‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः माघ मासे बसंत पंचमी तिथौ भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।’ यह मंत्र बोलें। फिर हाथ में रखी हुई सामग्री को मां सरस्वती के सामने अर्पित करें।
पूजन विधि
अब मां सरस्वती की पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। फिर मां सरस्वती की मूर्ति को सामने रखकर उनके सामने धूप-दीप और गुगुल आदि जलाएं। इसके बाद विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा शुरू करें। मन में मां सरस्वती का ध्यान करें और पूजन सामग्री अर्पित करें।
सरस्वती वंदना
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।
हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।
सरस्वती मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः।
ॐ सरस्वत्यै नमः।
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नम:।
ॐ भूर्भुवः स्वः सरस्वती देव्ये इहागच्छ इह तिष्ठ।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः।
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी
वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।
शारदायै नमस्तुभ्यं, मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।
GDS Times | Hindi News Latest News & information Portal