अडानी समूह के बॉन्ड लगातार दूसरे दिन दबाव में रहे, जब अमेरिकी अभियोजकों ने समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी और अन्य अधिकारियों पर $265 मिलियन की रिश्वत देने के आरोप लगाए। इस कथित कांड ने अडानी समूह की छवि और वित्तीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वित्तीय प्रभाव:
2027 में परिपक्व होने वाले अडानी पोर्ट्स और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के बॉन्ड की कीमत 92 सेंट प्रति डॉलर रही, जबकि लंबे समय के बॉन्ड 80 सेंट के आसपास कारोबार कर रहे थे। इसके साथ ही, अडानी समूह की कंपनियों ने गुरुवार को बाजार मूल्य में लगभग $27 बिलियन का नुकसान झेला।
कंपनी का बयान:
अडानी समूह ने इन आरोपों को “निराधार” और “अस्वीकृत” करार दिया। कंपनी ने कहा, “हम अपने निवेशकों, साझेदारों और कर्मचारियों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि हम कानून का पालन करने वाला संगठन हैं, और सभी कानूनी उपायों का सहारा लेंगे।”
आरोप और कानूनी कार्रवाई:
अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि अडानी समूह के अधिकारियों ने भारत की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना और अन्य अनुबंधों को हासिल करने के लिए रिश्वत दी। यह परियोजनाएं 20 साल में $2 बिलियन का लाभ देने की क्षमता रखती थीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव:
इस विवाद के बाद केन्या ने अडानी समूह के साथ $2 बिलियन का एक महत्वपूर्ण सौदा रद्द कर दिया, जो देश के मुख्य हवाई अड्डे का प्रबंधन उन्हें सौंपने वाला था।
यह घटनाक्रम अडानी समूह की वैश्विक छवि और वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है। मामले की जांच और भविष्य की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में जाएगा।