केरल के कालीकट जिले में स्थानीय सहकारी बैंक के चुनाव के दौरान कांग्रेस और CPI(M) समर्थित विद्रोही गुट के कार्यकर्ताओं के बीच तीव्र झगड़ा हुआ। यह विवाद तब शुरू हुआ जब विद्रोही समूह, जो पूर्व कांग्रेस सदस्यों और CPI(M) का समर्थन प्राप्त कर रहा था, ने 61 सालों से कांग्रेस के नियंत्रण में रहे बैंक के निदेशक मंडल पर कब्जा कर लिया।
चुनाव परिणामों के बाद तनाव इतना बढ़ गया कि दोनों गुट हिंसक झगड़े पर उतर आए। इसी बीच, एक एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंची, और झगड़े में लगे कार्यकर्ताओं ने इंसानियत दिखाते हुए तुरंत अपने झगड़े को रोक दिया और एम्बुलेंस को रास्ता दिया। वीडियो में यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें यह देखा गया कि एम्बुलेंस के निकलते ही झगड़ा दोबारा शुरू हो गया।
यह घटना केवल राजनीतिक तनाव का उदाहरण नहीं थी, बल्कि यह दिखाती है कि नागरिकता और इंसानियत का महत्व केरल में कितनी गहराई से महसूस किया जाता है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना की सराहना की। एक उपयोगकर्ता ने इसे “केरल स्टोरी” कहा और टिप्पणी की, “पहले नागरिकता, फिर लड़ाई।”
दूसरी तरफ, उसी दिन एक अलग घटना में, एक कार चालक ने एम्बुलेंस को रास्ता देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उसे ₹2.5 लाख का जुर्माना भरना पड़ा। इन दोनों घटनाओं ने राज्य में नागरिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की दो परस्पर विरोधी तस्वीरें पेश कीं।
यह घटना केरल के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य की जटिलता और जनता की नैतिकता को उजागर करती है।