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पेयजल निगम में एक बड़ा रोचक मामला आया सामने, जानें ..

उत्तराखंड पेयजल निगम में एक बड़ा रोचक मामला देखने में आया है। यहां एक अधिशासी अभियंता का विकासनगर से देहरादून ट्रांसफर होने पर करोड़ों के ठेके भी विकासनगर से दून स्थानांतरित कर दिए गए। यह आदेश महकमे में खासी चर्चाओं में है। सवाल उठ रहा है कि क्या बाकी इंजीनियर इस लायक नहीं हैं जो निर्माण कार्यों की मॉनिटिरंग कर सकें।

पेयजल निर्माण विंग दून के ईई केएम सिंह के 30 नवंबर को रिटायर होने के बाद विकासनगर विंग के ईई रवींद्र कुमार का दून तबादला किया गया। विकासनगर विंग के अधीन पांच बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं। मुख्य महाप्रबंधक सीएस रजवार ने 20 दिसंबर को ये पांच निर्माण कार्य विकासनगर से दून के ईई के अधीन हस्तांतरित कर दिए।

इससे इंजीनियर भी हक्के-बक्के हैं। उनका कहना हैकि क्या बाकी इंजीनियर इस लायक नहीं हैं जो निर्माण कार्यों की मॉनिटिरंग कर सकें। उधर, उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर संघ के अध्यक्ष रामकुमार ने चेतावनी दी है कि अगर इस तरह के आदेश किए जाते हैं तो संघ आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

संघ के विरोध के बाद मुख्य महाप्रबंधक रजवार ने प्लास्टिक इंजीनियर संस्थान, कम्युनिटी सेंटर व कृषि निदेशालय भवन निर्माण कार्य को वापस विकासनगर ट्रांसफर कर दिए हैं।

दो इंजीनियर भी कर दिए संबद्ध
पेयजल निगम में हद तो तब हो गई, जब विकासनगर निर्माण विंग के दो इंजीनियरों को भी हस्तांतरित निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए दून संबद्ध कर दिया। 22 दिसंबर को मुख्य अभियंता मुख्यालय एससी पंत की तरफ से यह आदेश जारी हुए है, जिसमें विकासनगर निर्माण विंग में तैनात एई संजय कुमार और अपर सहायक अभियंता शीतल गुरुंग को सैन्यधाम निर्माण कार्यों की मॉॅनिटरिंग के लिए संबद्ध भी कर दिया।

मेरी जानकारी में भी यह मामला आया था, मैंने मुख्य महाप्रबंधक को निर्माण कार्य विकासनगर विंग के अधीन ही रखने के निर्देश दिए हैं। सिर्फ दो कार्य मंत्री महोदय के निर्देश पर संबंधित अधिशासी अभियंता की निगरानी में दिए गए हैं। निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए जिन दो इंजीनियरों को संबद्ध किया गया था, उन्हें भी तत्काल रोकने को कहा गया है। 

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