भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक दिन रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) का दौरा किया, जहाँ उन्होंने न केवल अत्याधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन किया, बल्कि स्वदेशी तकनीक की शक्ति का भी प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने आकाश तृतीय और चतुर्थ रेजिमेंट युद्ध प्रणालियों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और ‘माउंटेन फायर कंट्रोल रडार’ का अनावरण किया। सिंह ने पुणे में स्थित कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-एआई) का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया और औपचारिक रूप से कंपनी की एआई नीति की शुरुआत की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय मंत्री को भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित एआई-आधारित समाधानों सहित कई उन्नत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी दी गई, जो रक्षा तंत्र में नवाचार और स्वदेशीकरण पर बढ़ते जोर को उजागर करता है। सिंह ने इस बात को स्वीकार किया कि हवाई क्षेत्र रक्षा और ड्रोन-विरोधी अभियानों में विकसित प्रणालियों ने यह प्रदर्शित किया है कि भारत के स्वदेशी समाधान वैश्विक मानकों को पूरा कर सकते हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का उल्लेख
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे स्वदेशी रूप से विकसित वायु रक्षा (Air Defence) और ड्रोन-रोधी प्रणालियों ने दुश्मन के खतरों को बेअसर करने में प्रभावी भूमिका निभाई। उन्होंने गर्व से कहा कि भारत की स्वदेशी प्रणालियाँ अब वैश्विक मानकों को टक्कर दे रही हैं।
रक्षा मंत्री का संदेश: “हवाई क्षेत्र की रक्षा और ड्रोन-विरोधी अभियानों में हमारे समाधानों ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं है।”
युवाओं और स्टार्टअप्स से संवाद
मंत्री महोदय ने भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित एआई-आधारित समाधानों का अवलोकन किया। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों को प्रेरित करते हुए कहा कि रक्षा तंत्र में नवाचार और स्वदेशीकरण ही भारत को वैश्विक शक्ति बनाएगा।
GDS Times | Hindi News Latest News & information Portal