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आज कारगिल विजय दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने वीर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि….

आज कारगिल विजय दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल के वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि भारत माता की आन, बान, शान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को नमन। कारगिल में देश के वीरों का सिंहनाद आज भी उसी वेग से गूंज रहा है।

कारगिल युद्ध शोध का विषय

भारतीय सेना ने हमेशा ही असाधारण काम किए हैं। कारगिल युद्ध कई रणनीतिकारों के लिए शोध का विषय है। अति विषम और विपरीत परिस्थितियों में ये युद्ध जीता गया। सैनिक पुत्र होने के कारण सैन्य परिवार की मनोस्थिति को अच्छी तरह समझता हूं। मैं बहुत छोटा था, तब सैनिकों का पार्थिव शरीर नहीं, बस बलिदान की बस सूचना आती थी। पर अटल बिहारी वाजपई की सरकार ने पार्थिव शरीर घर भेजने की व्यवस्था की।

सैनिकों के समर्पण से मिलती सीख

सेना सदियों सदियों से हमारी प्रेरणा रही है। उत्तराखंड के शूरवीर हमेशा देश के लिए बलिदान देने में आगे रहे हैं। देशभक्ति में वो मां की ममता, पत्‍नी–बच्चों की चिंता, बहन की रखी का वचन सब पीछे छोड़ देता है। सैनिकों के समर्पण से सीख मिलती है।

आज कोई नहीं देख सकता आंख उठाकर

आज कोई हमारी तरफ आंख उठाकर नहीं देख सकता। कोई भी दुश्मन आंख उठाएगा तो उसे करारा जवाब मिलेगा। आज सेना गोली का जवाब गोले से देती है। सेना का मनोबल बढ़ा है। क्योंकि देश को एक सशक्त नेतृत्व मिला है।

अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में जोश

देश का मान, स्वाभिमान और सम्मान बढ़ा है। सैनिकों को सम्मानित करके खुद सम्मानित हुए हैं। अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में जोश है। सेना केवल वेतन का जरिया नहीं, बल्कि देशभक्ति,अनुशासन और पराक्रम का भाव है। कुमाऊं और गढ़वाल में भर्ती रैली होने वाली है। सरकार से जो भी सहयोग होगा हम करेंगे।

इस दौरान सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र चौधरी ने कहा कि कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। न केवल दुश्मन को परास्त किया, बल्कि एलओसी से पीछे खदेड़ दिया। उत्तराखंड के 75 वीरों ने इस युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी। यहीं नहीं अदम्य साहस के परिचय देते हुए 37 वीरता पदक भी जीते।

कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि उन वीर सपूतों को नमन जिन्होंने मां भारती के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उत्तराखंड देवभूमि ही नहीं वीरभूमि भी है। अगले तीन साल में उत्तराखंड अपनी रजत जयंती मनाएगा। हम किसी भी पृष्ठभूमि से हों सभी का एक ही सपना होना चाहिए कि कैसे उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो। इसके लिए सामूहिक रूप से प्रयास करना होगा।

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