गुरुदेव, असफल होने के बाद दोबारा कैसे वापसी करें ? …लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे, इस चिंता से कैसे निकलूं ?…अपने शरीर और रूप-रंग को लेकर मन में उठने वाली हीनभावना से कैसे निपटूं? ये सिर्फ सवाल नहीं थे, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के दिमाग में चल रही उलझनों की आवाज थीं। 2,000 युवाओं के सामने श्री श्री रविशंकर ने सोशल मीडिया से पैदा होने वाली बेचैनी, अपनी अलग पहचान बनाने की दिक्कत, असफलता, अपनापन और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। जब एक युवा ने पूछा कि भीड़ का हिस्सा बने बिना अपनी अलग पहचान कैसे बनाए, तो गुरुदेव का जवाब सीधा था- आप ट्रेंडसेटर बनिए। श्री श्री रविशंकर ने शुक्रवार को बेंगलुरु में ‘Gen Z × Gurudev 2.0’ के दौरान सोशल मीडिया की चिंता, असफलता, आत्मविश्वास, शरीर को लेकर हीनभावना और जीवन की चुनौतियों पर युवाओं ने खुलकर बात की। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने हर सवाल का जवाब सहजता, हास्य और गहरी समझ के साथ दिया।
घबराए युवा को ध्यान, सुदर्शन क्रिया और भस्त्रिका करने की सलाह
सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने और लोगों के सामने आने को लेकर घबराए एक युवा को उन्होंने ध्यान, सुदर्शन क्रिया और भस्त्रिका करने की सलाह दी, ताकि वह ज्यादा सहजता से खुद को व्यक्त कर सके। शरीर और रूप-रंग की चिंता पर उन्होंने याद दिलाया कि शरीर हर वक्त बदलता रहता है। असफलता से उबरने के सवाल पर गुरुदेव ने कहा कि परिणामों से न तो जरूरत से ज्यादा चिपकना चाहिए और न ही उनसे पूरी तरह कट जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “ जो आता है, उसे सहजता से स्वीकार करें। ” एक युवा ने बाद में बताया कि यह बात सुनकर उसे राहत मिली कि दस बार असफल होने के बाद भी आगे बढ़ना बंद करने की कोई वजह नहीं है।.
व्यक्तिगत सवाल के जवाबों ने जीवन और समाज की बड़ी तस्वीर खोली
कई सवाल व्यक्तिगत थे, लेकिन जवाब जीवन और समाज की बड़ी तस्वीर खोलते थे। जाति और नस्ल के भेदभाव से ऊपर उठने के सवाल पर गुरुदेव ने कहा कि किसी बड़े उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता लोगों को उनके मतभेदों से ऊपर उठाकर एकजुट कर सकती है। धरती और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी ऐसा ही एक साझा उद्देश्य है। एक युवा ने पूछा कि उसे कैसे पता चले कि लोग उसकी परवाह करते हैं। गुरुदेव ने अपने अंदाज में जवाब दिया कि यह जानना उतना ही स्वाभाविक है, जितना यह समझना कि दोपहर हो चुकी है। यही माहौल इस आयोजन की खासियत था-यहां युवा बिना किसी औपचारिकता के अपने मन की बात पूछ सकते थे। यह कोई पारंपरिक व्याख्यान नहीं, बल्कि एक खुली और आत्मीय बातचीत थी।
ज्ञान और विवेक को अपने जीवन का केंद्र बनाइए
जब पूछा गया कि “ गुरु ही लक्ष्य हैं ” का क्या मतलब है, तो गुरुदेव ने कहा, “ ज्ञान और विवेक को अपने जीवन का केंद्र बनाइए। ” और जब युवाओं ने कहानी सुनाने को कहा, तो वे मुस्कुराकर बोले, “मैं कहानियां सुनाता नहीं, कहानियां रचता हूं।” युवाओं की आत्महत्या के मुद्दे पर गुरुदेव का स्वर गंभीर हो गया। उन्होंने युवाओं से एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाने और प्रेम संबंध टूटने या परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक नतीजा न मिलने पर आने वाली निराशा से बाहर निकलने में एक-दूसरे की मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने साफ कहा कि किसी असफलता को जीवन की संभावनाओं का अंत नहीं मानना चाहिए।गुरुदेव ने युवाओं को करियर बनाने, नए कौशल सीखने और अपने पेशे के साथ संगीत, कला तथा रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालने की प्रेरणा भी दी।उन्होंने कहा, “दुनिया आपकी है। इस पर आपका अधिकार है। इसकी जिम्मेदारी भी लीजिए। आपके लिए आसमान ही सीमा है। अपने उत्साह और उमंग को कभी कम न होने दें।”
हनुमान अंश के कलाकारों ने की मंच से आगे की बातचीत
फिल्म ‘हनुमान अंश-शोभिनव सत्य’ के प्रमुख कलाकार शोभिनव और पूर्णिमा तिवारी भी इस आयोजन में शामिल हुए। फिल्म में शोभिनव ने नीम करोली बाबा और पूर्णिमा तिवारी ने रामबेटी की भूमिका निभाई है। शोभिनव ने बताया कि जेन जेड ने फिल्म को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने फिल्म के प्रचार के दौरान सुदर्शन क्रिया सीखने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा, “ मैंने क्रिया के बारे में सुना तो था, लेकिन जब मैंने इसका अभ्यास किया, तब समझ पाया कि यह वास्तव में क्या है। ” उनके मुताबिक, अभ्यास शुरू करने के पहले दिन से ही उन्हें अपने रोजमर्रा के व्यवहार और लोगों से बातचीत में फर्क महसूस होने लगा।
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