रूस और भारत की कितनी मजबूत और विश्वास से भरी दोस्ती है। आए दिन इसकी झलक देखने को मिलती रहती है। जब भी भारत पर कोई भी संकट आया तो रूस चट्टान की तरह खड़ा दिखाई दिया। रूस ने हमेशा से ही भारत के लिए वो फैसले लिए जो इसके विकास में रफ्तार देने वाले साबित हो। रूस और भारत की दोस्ती तोड़ने के लिए अमेरिका जैसे देशों ने ना जाने कितनी कोशिशें की। लेकिन हर बार उनकी कोशिशें नाकाम ही साबित हुई। अब रूस ने भारत के लिए ऐसा धमाकेदार काम किया है जिसने अमेरिका, चीन समेत दुनिया के बड़े-बड़े देशों को हिलाकर रख दिया है। यही नहीं बल्कि रूस के एक ऐलान के बाद कई देश भी भारत के समर्थन में कूद पड़े। दरअसल रूस ने भारत को वीटो पावर दिलाने के लिए यूएन में खुलकर समर्थन करते हुए ऐसी बात कही कि सब देखते रह गए। रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावरोव ने यूएनएससी में भारत को स्थाई सदस्य बनाए जाने की मांग का एक बार फिर समर्थन किया। लावरोव ने कहा कि रूस सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सदस्य बनाए जाने का समर्थन करता है। उन्होंने पश्चिमी देशों को और सीटें दिए जाने के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा कि सुरक्षा परिषद के विस्तार में पश्चिमी देशों के लिए अतिरिक्त स्थाई सीटें नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से जर्मनी और जापान को स्थाई सदस्य बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया। खास बात तो यह है कि रूस ने जैसे ही भारत को वीटो पावर दिलाने का सपोर्ट किया तो तुरंत कई और देश भी भारत के समर्थन में उतर आए। भारत की स्थाई सदस्यता की दावेदारी को जर्मनी, जापान, मॉरीशिस, पुर्तगाल समेत कई देशों का समर्थन मिला है। दरअसल, भारत दुनिया के कई मंचों के जरिए लंबे समय से यूएन में सुधारों की मांग का मुद्दा उठाता आ रहा है। हाल ही में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया गया था। भारत का कहना है कि वर्तमान परिषद की संरचना काफी पुरानी है और इसमें आज की वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव होना चाहिए। दरअसल यूएससी में कुल 15 सदस्य होते हैं। जिनमें वीटो पावर वाले पांच स्थाई सदस्य हैं। जिसमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। इसके अलावा 2 साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थाई सदस्य भी शामिल हैं। यूएन चार्टर में बदलाव के लिए यूएन जनरल असेंबली में दो तिहाई बहुमत और सदस्य देशों के दो तिहाई हिस्से से औपचारिक मंजूरी की जरूरत होती है। इस मंजूरी में सभी पांच स्थाई सदस्यों का शामिल होना जरूरी है। यूएनएससी में स्थाई सदस्य के लिए अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन कई बार खुलकर भारत का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि चीन भारत की स्थाई मेंबरशिप का स्पष्ट समर्थन करने से बचता रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय में चीन के रूप में बदलाव देखने को मिला है। चीन भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की कोशिशों में लगा हुआ है।
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