पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम का आज 16 सितंबर को अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह कांग्रेस के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वर्तमान समय में पी चिदंबरम राज्यसभा के सांसद हैं और पार्टी के रणनीतिक और नीतिगत मामलों में अहम भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार में यूपीए के समय चिदंबरम देश के वित्त मंत्री और गृहमंत्री जैसे पद भी संभाल चुके हैं। वहीं कांग्रेस के लिए वह कई बार संकटमोचन तो कई बार किरकिरी की वजह भी बने हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर पी चिदंबरम के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
तमिलनाडु के कनाडुकथन गांव में 16 सितंबर 1945 को पी. चिदंबरम का जन्म हुआ था। इनका पूरा नाम पलानीअप्पन चिदंबरम है। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन सेकेंडरी स्कूल से पूरी की थी। फिर चेन्नई के प्रेसीडेंट कॉलेज से साइंस में सांख्यिकी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वहीं चिदंबरम ने बोस्टन के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर की डिग्री प्राप्त की।
सियासी सफर
मई 2004 से लेकर नवंबर 2008 तक चिदंबरम ने वित्त मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद मुंबई आतंकी हमले के बाद पी चिदंबरम को देश का गृहमंत्री बनाया गया। करीब साढ़े तीन साल तक गृह मंत्रालय का पद संभालने के बाद वह मनमोहन सरकार में फिर दोबारा वित्त मंत्री बने।
आर्थिक मामलों के जानकार
पी. चिदंबरम की देश की आर्थिक नीतियों और वित्तीय मामलों पर पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। वह करीब 7 बार देश का आम बजट संसद में पेश कर चुके हैं। जिनमें से उन्होंने 5 बजट संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में बतौर वित्त मंत्री के रूप में पेश किया था। आर्थिक विशेषज्ञता के साथ-साथ वरिष्ठ वकील होने के नाते वह पार्टी के लिए मजबूत आर्थिक, कानूनी और संवैधानिक मामलों में रणनीति भी तैयार करते हैं। संसद का सदन हो या मीडिया का मंच वह पार्टी की बात को बेबाकी से रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। इसके अलावा वह वित्त समिति के साथ-साथ वित्त मंत्रालय सलाहकार समिति के सदस्य हैं। वह भारत-इटली संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष की जिम्मेदारी के फरवरी 2026 से संभाल रहे हैं।
पार्टी से हो जाता है वैचारिक मतभेद
पी चिदंबरम अपनी बेबाक शैली और स्वतंत्र सोच के लिए भी जाने जाते हैं। हालांकि कई बार चिदंबरम के व्यक्तिगत विचार पार्टी से अलग दिखते हैं। जिस वजह से कांग्रेस को राजनीतिक रूप से डैमेज कंट्रोल की भी जरूरत पड़ती है। अभी हाल ही में हुए BRICS सम्मेलनों के औचित्य पर सवाल उठाने की वजह से काफी विवाद खड़ा हो गया था।
विवादों से रहा नाता
चिदंबरम अपने राजनीतिक जीवन में कई मौके पर अपने तीखे बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं। पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए चिदंबरम ने कहा था कि अगर विरोधियों को ऐसा कहा जाता है, तो वह खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहने में गर्व महसूस करेंगे। वहीं साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के दौरान चिदंबरम ने कहा था कि अगर कश्मीर हिंदू बाहुल राज्य होता, तो सरकार द्वारा ऐसा कदम नहीं उठाया जाता। उनके इस बयान पर काफी राजनीतिक बवाल हुआ था।
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