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Van Mahotsav Week 2026: Monsoon में क्यों शुरू होता है भारत का सबसे बड़ा Green Festival?

हर साल 01 जुलाई से 07 जुलाई के बीच वन महोत्सव सप्ताह मनाया जाता है। सप्ताह भर चलने वाला यह कार्यक्रम भारत में मानसून की शुरूआत का प्रतीक है। इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य नागरिकों और समुदायों को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए एकजुट करना है। इसके अलावा जन-जागरुकता अभियान भी चलाया जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम के बारे में…
इतिहास
वन महोत्सव को ‘वृक्षों का त्योहार’ भी कहा जाता है। भारत का वार्षिक वृक्षारोपण उत्सव है, जोकि पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। साल 1950 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री के.एम. मुंशी ने इस महोत्सव को मनाने की शुरूआत की थी। इस सप्ताह की शुरूआत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वनों के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए की गई थी।
बता दें कि पिछले 76 सालों में वन महोत्सव भारत में वृक्षारोपण, पारिस्थितिक बहाली और जैव विविधता के लिए सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक बन गया है। यह सप्ताह लाखों लोगों को हरित आवरण बढ़ाने और अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करता है।
क्यों मनाया जाता है वन महोत्सव
देश की आजादी के बाद वनों की कटाई, मृदा अपरदन, घटते वन संसाधनों और घटती बारिश को लेकर बढ़ती चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह सप्ताह मनाए जाने की शुरूआत हुई। वन संरक्षण के प्रयासों में व्यापक जन भागीदारी की जरूरत को समझते हुए के.एम मुंशी ने वन महोत्सव को एक राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान के रूप में शुरू किया था।
इस पहल ने जल्द ही गति पकड़ी और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में हर साल एक परंपरा के रूप में विकसित हुई। दशकों ने इस महोत्सव ने पर्यावरण जागरुकता को बढ़ावा देने में मदद की है

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