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एविएशन सेक्टर में महाक्रांति! अमेरिका हटाने जा रहा है सुपरसोनिक उड़ानों पर 53 साल पुराना प्रतिबंध, अब घंटों का सफर मिनटों में!

हवाई यात्रा के शौकीनों और एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक बेहद रोमांचक खबर सामने आ रही है। आसमान में ध्वनि की गति से भी तेज उड़ने वाले विमानों यानी सुपरसोनिक फ्लाइट्स (Supersonic Flights) की कमर्शियल उड़ानों पर लगा पांच दशकों से ज्यादा पुराना प्रतिबंध जल्द ही इतिहास बन सकता है। अमरीकी परिवहन विभाग और फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने विमानन नीति में अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत 1973 से जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को हटाकर ‘शोर-आधारित नियमों’ (Noise-based Rules) से बदलने की तैयारी की जा रही है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो बेहद तेज कमर्शियल हवाई यात्रा का एक नया और आधुनिक दौर शुरू हो जाएगा।
यह प्रस्ताव अमेरिकी एविएशन में दशकों के सबसे अहम पॉलिसी बदलावों में से एक है और ऐसे समय में आया है जब विमान टेक्नोलॉजी में तरक्की की वजह से कम शोर वाली सुपरसोनिक यात्रा ज़्यादा मुमकिन हो रही है।
सुपरसोनिक उड़ानें क्या हैं?
सुपरसोनिक उड़ान का मतलब है ध्वनि की गति से तेज़ चलने वाला विमान। ध्वनि की गति, जिसे ‘मैक 1’ (Mach 1) कहा जाता है, लगभग 767 मील प्रति घंटा या 1,235 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस गति से तेज़ उड़ने वाले किसी भी विमान को सुपरसोनिक माना जाता है। ऐसे विमान लंबी दूरी के रूट पर यात्रा के समय को काफी कम कर सकते हैं, जिससे वे भविष्य के कमर्शियल एविएशन के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं।
अमेरिका में अभी क्या नियम है?
फिलहाल, पूरे अमेरिका में ज़मीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों पर प्रतिबंध है। जो विमान ध्वनि की गति से तेज़ उड़ना चाहते हैं, उन्हें अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) से खास इजाज़त लेनी होती है। ये इजाज़त आम तौर पर रिसर्च और टेस्टिंग के मकसद तक सीमित होती है और सिर्फ़ कम आबादी वाले या दूर-दराज़ इलाकों में दी जाती है ताकि निवासियों पर सोनिक बूम (तेज़ आवाज़) का असर कम से कम हो।
अमेरिका ने क्या बदलाव प्रस्तावित किए हैं?
अमेरिकी परिवहन विभाग और FAA ने 1973 के प्रतिबंध को शोर-आधारित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बदलने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के तहत, ध्वनि की गति से तेज़ उड़ने वाले विमानों को ज़मीन के ऊपर उड़ान भरने की इजाज़त दी जा सकती है, अगर वे तय शोर सीमा के भीतर रहते हैं। सुपरसोनिक उड़ानों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय, नए नियम इस बात पर ध्यान देंगे कि विमान कितना शोर पैदा करता है। FAA इस साल के आखिर में टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान होने वाले शोर को नियंत्रित करने के लिए अलग मानक लाने की भी योजना बना रहा है। उम्मीद है कि दोनों तरह के नियम 2027 के मध्य तक फाइनल हो जाएंगे।
अमेरिका अभी इस बदलाव पर क्यों विचार कर रहा है? इस प्रस्तावित नीति बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण NASA का एक्सपेरिमेंटल X-59 एयरक्राफ्ट है। इसे सुपरसोनिक उड़ान के दौरान होने वाली तेज़ ‘सोनिक बूम’ (तेज़ आवाज़) को काफी कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 5 जून को हुए एक टेस्ट के दौरान, यह एयरक्राफ्ट 43,400 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए 713 मील प्रति घंटे (लगभग 1,148 किलोमीटर प्रति घंटे) की स्पीड तक पहुंच गया।

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