सेशेल्स यात्रा से लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सभी प्रमुख विभागों के सचिवों के साथ करीब चार घंटे तक व्यापक महामंथन किया। इससे पहले मई महीने में पांच देशों की विदेश यात्रा से वापस आने के तुरंत बाद भी प्रधानमंत्री ने अपनी मंत्रिपरिषद के साथ लंबी बैठक कर मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की थी। अब सचिवों के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि प्रधानमंत्री अपनी सरकार की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया की रफ्तार को और तेज करने के पक्ष में हैं। हम आपको बता दें कि नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में आयोजित इस बैठक में आत्मनिर्भरता, कारोबार में सुगमता, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को अलग-अलग दायरों से बाहर निकलकर समन्वित तरीके से काम करने का संदेश दिया और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समयबद्ध तथा परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार के सभी विभागों को अलग-अलग दायरों में काम करने की बजाय “समूची सरकार” के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विभागीय दीवारों को तोड़कर समन्वित योजना और पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने पीएम गतिशक्ति मंच के व्यापक उपयोग की वकालत करते हुए कहा कि यह विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय और सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एकीकृत योजना और साझा कार्यप्रणाली के माध्यम से योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि बैठक की शुरुआत अपेक्षाकृत हल्के अंदाज में हुई। प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि वह इस बार केवल सुनने की भूमिका में रहेंगे। इसके बाद तीन दर्जन से अधिक सचिवों ने लगभग तीन-तीन मिनट में अपनी बात रखी। बैठक का संचालन कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने किया। उन्होंने सरकारी वेबसाइटों और पोर्टलों को आम नागरिकों के लिए अधिक सरल और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। चर्चा के दो प्रमुख विषय रहे। पहला, कारोबार करने और जीवन को आसान बनाने के लिए विनियमन में कमी तथा अन्य सुधार, और दूसरा आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना। इसी क्रम में कई मंत्रालयों ने विदेशी निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की। इस दौरान सबसे अधिक चर्चा सस्ते चीनी आयात और विदेशी उत्पादों की डंपिंग को लेकर हुई। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने कहा कि भारत में इस्पात की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि चीन सहित कई देशों में मांग में गिरावट देखी जा रही है। ऐसी स्थिति में विदेशी कंपनियां कम कीमत पर इस्पात भारत भेज रही हैं, जिससे घरेलू उद्योग प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार से भारतीय उत्पादकों को संरक्षण देने और सस्ते विदेशी माल की डंपिंग रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता बताई। बैठक में यह भी कहा गया कि कुछ चीनी इस्पात उत्पाद आसियान देशों के रास्ते भारत पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र देश के कुल कच्चे इस्पात उत्पादन में लगभग पैंतालीस प्रतिशत योगदान देता है। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा और मजबूती के लिए विशेष कदम उठाना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सरकार घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने और विदेशी दबाव से बचाने की दिशा में नीतिगत उपायों पर विचार कर रही है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बताया कि भारत सौर पैनलों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन सौर सेल के लिए अब भी विदेशों, विशेषकर चीन, पर भारी निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने की जरूरत बताई ताकि इस क्षेत्र में भी आयात पर निर्भरता कम हो सके। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि साइबर सुरक्षा व्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकों का स्वदेशीकरण बेहद जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इन क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता बनी रही तो भविष्य में बाहरी ताकतें इनका दुरुपयोग कर सकती हैं। रक्षा सचिव आरके सिंह ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन के हालिया युद्धों का उल्लेख करते हुए हथियारों और गोला बारूद के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य हो गया है। बैठक के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक सुधारों पर भी विचार हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले स्थलों और आरक्षित वनों की संख्या बढ़ना संतोषजनक है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए भी समूची सरकार के दृष्टिकोण से काम करना होगा। उन्होंने योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नियमित समीक्षा और स्पष्ट परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों से कहा कि किसी भी योजना की सफलता का वास्तविक मापदंड लोगों के जीवन पर उसका प्रत्यक्ष प्रभाव होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ आम नागरिकों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहिए। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था के उपयोग पर भी चर्चा हुई। कुल मिलाकर यह बैठक सरकार की भावी नीतियों, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य, प्रशासनिक समन्वय और आर्थिक सुरक्षा को लेकर गंभीर मंथन का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। इसमें स्पष्ट संकेत मिला कि केंद्र सरकार आने वाले समय में घरेलू उद्योगों की सुरक्षा, तकनीकी स्वदेशीकरण और बेहतर प्रशासनिक तालमेल को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने जा रही है।
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