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धामी सरकार का मजदूरों को बड़ा तोहफा, DBT से खातों में सीधे भेजे 93 करोड़ रुपये

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के गरीब और मजदूर परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। इसे राज्य के इतिहास में मजदूरों की भलाई के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा माना जा रहा है। सरकार ने दलालों और बिचौलियों को पूरी तरह से हटाकर ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ यानी डीबीटी के जरिए सीधे मजदूरों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजना शुरू कर दिया है।
24 हजार से ज्यादा मजदूरों को सीधा लाभ
सरकार की अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं के तहत 24 हजार से ज्यादा मजदूरों को सीधे पैसे भेजे गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 93.06 करोड़ रुपये की रकम मजदूरों और उनके परिवारों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है, जिससे हजारों परिवारों का जीवन आसान हुआ है।
4400 से ज्यादा मजदूरों को मिले 11 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुए एक कार्यक्रम में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के जरिए 4,400 से अधिक मजदूरों के खातों में करीब 11 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए। यह सारा पैसा बिना किसी देरी के एक ही बार में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर किया गया।
हर जरूरत में मददगार बन रही सरकार
यह आर्थिक मदद मजदूरों की रोजमर्रा और खास जरूरतों को देखकर दी गई है। इसमें श्रमिक परिवारों की बेटियों की शादी के लिए पैसा, किसी सदस्य की अचानक मौत होने पर मिलने वाली मदद, महिला मजदूरों के लिए मातृत्व लाभ और बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप शामिल है। इस मदद से हजारों परिवारों को बिना किसी कागजी चक्कर के सही समय पर राहत मिली है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सहारा
निर्माण कार्य में लगे मजदूर अक्सर असंगठित वर्ग में आते हैं। उनकी कमाई बंधी-बंधाई नहीं होती। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना, शादी, बच्चों की पढ़ाई या मौत जैसी स्थिति आने पर उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। इसी संकट को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने इन कल्याणकारी योजनाओं को और मजबूत किया है।
दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति, काम की जगह पर ही मिलेंगी सुविधाएं
उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों को देखते हुए सीएम धामी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब मजदूरों को किसी योजना का लाभ लेने या रजिस्ट्रेशन कराने के लिए दूर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रशासन खुद मजदूरों के पास जाएगा।
कार्यस्थलों पर लगेंगे विशेष कैंप
इसके लिए सरकार निर्माण वाली जगहों के पास ही ‘वर्कप्लेस वेलफेयर कैंप’ लगाने जा रही है। इन कैंपों के जरिए दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले प्रवासी और स्थानीय मजदूरों को वहीं पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा, सरकारी योजनाओं का लाभ, हेल्थ चेकअप और जरूरी सामान दिया जा रहा है। इससे मजदूरों का कीमती समय और आने-जाने का किराया दोनों बच रहा है।

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