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अब Punjab फतह के मिशन में जुटे Amit Shah, दिल्ली में BJP की बड़ी रणनीतिक बैठक में बना प्लान

पंजाब विधानसभा चुनाव भले ही अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने वहां चुनावी बिसात काफी पहले बिछा दी थी। पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और भारतीय राजनीति के आधुनिक चाणक्य माने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पिछले चार वर्षों से पंजाब की जमीन पर लगातार अपनी पार्टी के संगठन के विस्तार कार्यों को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। अब जबकि चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है, तब शाह ने खुद मोर्चा संभालते हुए चुनावी तैयारियों को निर्णायक गति दे दी है। इसी रणनीति को अंतिम धार देने के लिए शुक्रवार रात पंजाब भाजपा के दिग्गज नेताओं की अहम और लंबी बैठक हुई, जिसमें आने वाले चुनावी मुकाबले की पूरी रूपरेखा पर मंथन किया गया। हम आपको बता दें कि बैठक के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी के शीर्ष नेताओं और पंजाब इकाई के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ पहली विस्तृत रणनीतिक बैठक की। इस बैठक में आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल, संगठनात्मक मजबूती और राज्य के मौजूदा हालात पर गहन चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, पार्टी मुख्यालय पहुंचने से पहले अमित शाह ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के साथ लगभग आधे घंटे तक मुलाकात की। यह बातचीत उनके कर्तव्य भवन स्थित कार्यालय में हुई। इसके बाद शाह सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां पंजाब को लेकर कोर समूह की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक से पहले अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने प्रारंभिक विचार विमर्श किया, जिसमें चर्चा के मुख्य बिंदुओं को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद देर रात तक चली विस्तृत बैठक में पंजाब की राजनीतिक स्थिति, संगठन की तैयारियों और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक रात साढ़े दस बजे समाप्त हुई, जिसके बाद नेताओं ने साथ भोजन भी किया। बताया जा रहा है कि अमित शाह ने बैठक में मौजूद सभी नेताओं से पंजाब को बचाने के मुद्दे पर सुझाव मांगे। खास बात यह रही कि इस बैठक में पंजाब के उन राज्यसभा सांसदों को आमंत्रित नहीं किया गया था जो हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति, नशे की समस्या, आर्थिक बदहाली और आम आदमी पार्टी सरकार के कथित कुशासन को चुनावी मुद्दा बनाने पर व्यापक सहमति बनी। पार्टी का मानना है कि इन विषयों को जनता के बीच प्रभावी ढंग से उठाकर राजनीतिक लाभ हासिल किया जा सकता है। बैठक में यह भी तय किया गया कि भाजपा अब पंजाब में अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी। इसी क्रम में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का 20 से 22 जून तक पंजाब दौरा प्रस्तावित है। वह 21 जून को अमृतसर में योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके अलावा लुधियाना में भाजपा कार्यकर्ताओं की अब तक की सबसे बड़ी बैठक आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन में राज्य भर के करीब सात हजार बूथ प्रबंधकों को शामिल करने की योजना है। हम आपको बता दें कि इस बैठक में पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल ढिल्लों, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, अविनाश राय खन्ना और श्वेत मलिक, केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू, पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, अश्वनी शर्मा, राज्यसभा सदस्य तरुण चुग, इकबाल सिंह लालपुरा, मनप्रीत बादल, फतेह सिंह बाजवा, परमिंदर बराड़ और महिला मोर्चा अध्यक्ष जय इंदर कौर सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। संगठन की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। इनमें उत्तर भारत का दायित्व संभालने वाले सौदान सिंह, पंजाब के संगठन प्रभारी श्रीनिवासुलु और नरेंद्र रैना प्रमुख रहे। हम आपको यह भी बता दें कि पिछले सप्ताह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की थी। उधर, शुक्रवार रात की बैठक के बाद भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बैठक में पंजाब की जवानी, किसानी और राज्य की मूल भावना को बचाने पर गंभीर चर्चा हुई। वहीं प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों समेत अन्य पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और सरकार बनायेगी। पार्टी नेताओं का यह बयान बताता है कि पंजाब में अब भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गयी हैं।

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