भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 10 जून 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया। इस दिन नरेंद्र मोदी लगातार 4,399 दिन भारत के सबसे लंबे समय तक निरंतर पद पर रहने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए। यह केवल एक संख्यात्मक उपलब्धि नहीं, यह उस असाधारण संकल्पशक्ति का प्रमाण है, जो एक साधारण परिवार में जन्मे बालक ने दशकों की कठोर साधना से अर्जित की। नरेंद्र मोदी की यह यात्रा ऐसी ही कीर्ति की कथा है- एक चाय बेचने वाले बालक से लेकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के सर्वोच्च पद तक। 26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में उन्होंने दूसरा और नौ जून 2024 को तीसरा कार्यकाल प्राप्त किया। लगातार तीन बार जनादेश पाने वाले जवाहरलाल नेहरू के बाद वे दूसरे नेता बने। यह जनविश्वास की निरंतरता लोकतंत्र की सबसे बड़ी स्वीकृति है। इस उपलब्धि से पहले, जुलाई 2025 में मोदी ने इंदिरा गांधी को पीछे छोड़कर दूसरे सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री का स्थान प्राप्त किया था। यहां यह समझना आवश्यक है कि भारत की जनसंख्या, जो नेहरू के शासनकाल में लगभग 34 करोड़ थी, मोदी के शासनकाल में 131 करोड़ से बढ़कर 146 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इसी प्रकार, 1951-52 के पहले आम चुनाव में 53 राजनीतिक दल थे, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में 744 दल मैदान में थे। 2013-14 में देश का सकल घरेलू उत्पाद 103 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 तक बढ़कर 357 लाख करोड़ रुपये हो गया- यानी तीन गुने से भी अधिक की वृद्धि। इसी अवधि में 25 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाया गया। यह केवल आंकड़ा नहीं, यह करोड़ों परिवारों के जीवन में उजाले की कहानी है। जिस घर में पहले चूल्हे पर धुआं था, वहां उज्ज्वला योजना ने गैस का आलोक पंहुँचाया। जिस परिवार के पास बैंक खाता नहीं था, जन-धन योजना ने उसे वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से अब तक लाभार्थियों के खातों में 42 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। यह डिजिटल क्रांति का वह प्रतिफल है, जिसने बिचौलियों की लूट को समाप्त किया और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया। चाणक्य ने कहा था— ‘राष्ट्रं हि राजा रक्षति।’ राष्ट्र की रक्षा और सम्मान ही शासक का परम धर्म है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति, जिसने जम्मू-कश्मीर को 70 वर्षों तक देश की मुख्य विधिक धारा से अलग रखा था, इस दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय था। राम मंदिर का निर्माण, जो करोड़ों भारतीयों की आस्था और प्रतीक्षा का विषय था, इस कार्यकाल में साकार हुआ। ये केवल राजनीतिक निर्णय नहीं थे— ये भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के प्रतीक थे। ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी रक्षा तकनीक का सफल प्रयोग और नक्सलवाद की गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट भी इस सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती हैं। जो देश कभी अपनी सुरक्षा के लिए विदेशी शस्त्रों पर निर्भर था, वह आज ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत स्वदेशी हथियार निर्यात कर रहा है। एक और उल्लेखनीय तथ्य यह है कि प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्षों के अतिरिक्त, गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल को मिलाकर मोदी ने मार्च 2026 में 8,931 दिन लोकतांत्रिक शासन का नेतृत्व करते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले निर्वाचित शासनाध्यक्ष का रिकॉर्ड भी बना लिया था। यह समग्र यात्रा उनके प्रशासनिक अनुभव और जन-समर्पण की गहराई को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं कहा है कि आज पूरा विश्व कह रहा है कि यह भारत का युग है और भारत वैश्विक विकास का चालक बन गया है। जी-20 की अध्यक्षता में भारत ने जो नेतृत्व दिखाया, अफ्रीकी संघ को जी-20 में स्थान दिलाने का जो प्रयास किया, वह भारत की सॉफ्ट पॉवर की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। जो देश कभी विदेश नीति में रक्षात्मक मुद्रा में रहता था, आज वह बहुध्रुवीय विश्व में संतुलन स्थापित करने वाली अपरिहार्य शक्ति बन चुका है। किसी भी ऐतिहासिक यात्रा का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों से नहीं, उसकी चुनौतियों को समझने से भी होता है। बेरोजगारी की समस्या, कृषि संकट और आर्थिक असमानता जैसे प्रश्न आज भी राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा हैं, किंतु यह भी सत्य है कि 12 वर्षों की यह यात्रा उस भारत की कहानी है, जो नीति-पक्षाघात से निकलकर निर्णायक शासन की ओर बढ़ा है। 2014 से अब तक भारत ने तीव्र अवसंरचना विकास, डिजिटल उन्नति और नवीनीकृत वैश्विक प्रतिष्ठा के रूप में एक परिवर्तनकारी विकास देखा है। सामान्य से शिखर तक की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा-ग्रंथ बन गई है— यह संदेश देती हुई कि भारत-भूमि में संकल्प और सेवा की शक्ति से इतिहास रचा जाता है। इतिहास किसी नेता का मूल्यांकन उसके कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि उसके द्वारा छोड़ी गई विरासत से करता है। मोदी के 12 वर्षों ने भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और शासन व्यवस्था पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। समर्थकों के लिए यह परिवर्तन और विकास का युग है, जबकि आलोचकों के लिए यह कई अनुत्तरित प्रश्नों का दौर भी है, लेकिन एक तथ्य निर्विवाद है कि इन 12 वर्षों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी है। आने वाले वर्षों में इतिहास यह तय करेगा कि मोदी युग की उपलब्धियां और चुनौतियां किस रूप में याद की जाएंगी। फिलहाल इतना निश्चित है कि सामान्य से शिखर तक पहुंचने वाले इस नेता की 12 वर्षीय यात्रा भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में अपना स्थान बना चुकी है।
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