बासमती चावल में न्यूनतम निर्यात मूल्य पूर्णता समाप्त होने और गैर बासमती पर लगा प्रतिबंध हटने से निर्यात तेजी से बढ़ा है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश से वर्ष 2025-26 में 98,006 मीट्रिक टन बासमती और गैर बासमती 2,01,285 मीट्रिक टन कई देशों में निर्यात किया गया। जबकि वर्ष 2024-25 में 78,566 मीट्रिक टन बासमती और गैर बासमती 1,30,845 मीट्रिक टन व वर्ष 2023-24 में 58,572 मीट्रिक टन बासमती और 46,884 मीट्रिक टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया गया था। दरअसल, बासमती के निर्यात पर 1200 डालर प्रति टन न्यूनतम निर्यात मूल्य लगता था, जो निर्यातकों के हिसाब से अधिक था। इस वजह से निर्यात न के बराबर करते थे। केंद्र सरकार ने निर्यात बढ़ाने के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य अगस्त 2023 में घटाकर 950 डालर प्रति टन कर दिया। फिर भी निर्यात में इजाफा नहीं हुआ तो सितंबर 2024 में न्यूनतम निर्यात मूल्य पूर्णता समाप्त कर दिया गया। इससे निर्यात के रास्ते खुल गए और पिछले वर्षों की तुलना में अधिक निर्यात होने लगा है। इसी तरह बासमती की तुलना में गैर बासमती का निर्यात खूब होता रहा। इससे राज्यों में ही खुद के लिए गैर बासमती की उपलब्धता कम होने लगी। आगे हालात न बिगड़ें तो निर्यात कम करने के लिए सितंबर 2022 में गैर बासमती के निर्यात पर 20 फीसद सीमा शुल्क लगाया गया। इसके बाद भी गैर बासमती का निर्यात नहीं रुका तो केंद्र को कड़े कदम उठाते हुए 20 जुलाई 2023 को गैर बासमती के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी। हालात सामान्य होने के बाद अक्टूबर 2024 में निर्यात से प्रतिबंध हटा दिया गया। अब वर्ष 2026-27 में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक निर्यात की संभावना जताई जा रही है। वहीं, गेहूं, फल, सब्जी समेत कुल 22 तरह के कृषि उत्पादों का निर्यात भी 24 हजार करोड़ से बढ़कर 30 हजार करोड़ तक पहुंच गया है।
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