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योगी सरकार के प्रयासों का दिखा बड़ा असर : UP में सुधरी बच्चों की सेहत, मृत्युदर में आई बड़ी कमी

उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में योगी सरकार के प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में नवजात से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। यह सुधार न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच को दर्शाता है, बल्कि सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर बढ़ते जनविश्वास की भी पुष्टि करता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 26 से घटकर 25, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 37 से घटकर 35 तथा पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर 42 से घटकर 41 प्रति हजार रह गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार का परिणाम है। प्रदेश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से लेकर जिला महिला अस्पतालों तक चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नवजात शिशुओं के उपचार और देखभाल के लिए सीपैप मशीन, कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, नियमित टीकाकरण और नि:शुल्क दवा वितरण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। अस्पतालों में मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) की स्थापना से प्रसव के बाद मां और बच्चे की संयुक्त देखभाल सुनिश्चित हो रही है, जिससे नवजातों के स्वास्थ्य में सुधार आया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म के तुरंत बाद होने वाली मौतों में अपेक्षित गति से कमी नहीं आई है। ऐसे में प्रसव प्रक्रिया, डिलीवरी के दौरान चिकित्सा प्रबंधन और जीवन के पहले 48 घंटों में गुणवत्तापूर्ण देखभाल को और मजबूत करना अगली बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग इसी दिशा में विशेष रणनीति के तहत काम कर रहा है।

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